कच्चे माल की कमी से पटसन उद्योग संकट में, पश्चिम बंगाल की नई सरकार से हस्तक्षेप की मांग

कच्चे माल की कमी से पटसन उद्योग संकट में, पश्चिम बंगाल की नई सरकार से हस्तक्षेप की मांग

कच्चे माल की कमी से पटसन उद्योग संकट में, पश्चिम बंगाल की नई सरकार से हस्तक्षेप की मांग
Modified Date: May 18, 2026 / 12:39 pm IST
Published Date: May 18, 2026 12:39 pm IST

(बिशेस्वर मालाकर)

कोलकाता, 18 मई (भाषा) कच्चे पटसन की भारी कमी और कीमतों में तेज उछाल के बीच पश्चिम बंगाल के पटसन मिल मालिकों ने बड़े पैमाने पर मिल बंद होने एवं रोजगार पर इसके असर पड़ने की आशंका के बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत नई सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (आईजेएमए) के सूत्रों के अनुसार, हुगली औद्योगिक क्षेत्र में कम से कम 14 मिलों ने या तो संचालन रोक दिया है या कच्चे पटसन (जूट) की कमी एवं अव्यवहार्य लागत के कारण वे उत्पादन में गंभीर बाधा का सामना कर रही हैं।

आईजेएमए के एक पूर्व चेयरमैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ जूट बेलर्स एसोसिएशन (जेबीए) की दर 17,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर है, व्यापार पर रोक लगी है और नई फसल आने में अभी 10 सप्ताह बाकी हैं। ऐसे में बंगाल की मिलों से बिना कच्चे माल के संचालन करने को कहा जा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि मिल मालिकों को उम्मीद है कि नई सरकार ‘‘शेष भंडार जारी करने, आपातकालीन आयात की अनुमति देने और मिल को सहारा देने के लिए व्यवहार्य मूल्य दायरा बहाल करने’’ के लिए कदम उठाएगी। इसमे क्षेत्र में करीब दो लाख श्रमिक कार्यरत हैं।

मिल मालिकों के अनुमान के अनुसार आंशिक बंदी, उत्पादन में कटौती और अनियमित संचालन के कारण उत्तर 24 परगना और हुगली जिलों सहित आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 75,000 श्रमिक पहले ही ‘‘अनैच्छिक बेरोजगारी’’ का सामना कर रहे हैं।

उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले चार महीनों में संकट तेजी से बढ़ा है।

केंद्रीय वस्त्र सचिव को दिए एक ज्ञापन में जेबीए ने कहा कि व्यापार प्रतिबंध और किसी आधिकारिक मानक दर के अभाव ने बाजार को ‘‘पूर्ण अनिश्चितता’’ में डाल दिया है जिससे मिल के लिए खरीद लागत का आकलन करना एवं पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया है।

संघ ने आगाह किया कि मौजूदा संकट केवल मौसमी कमी नहीं बल्कि ‘‘ लंबे समय से जारी सट्टा भंडारण, विकृत बाजार परिस्थितियों एवं प्रशासनिक निष्क्रियता’’ का परिणाम है। इसने कच्चे पटसन की कीमतों को उद्योग के लिए अव्यवहार्य स्तर तक पहुंचा दिया है।

एक जूट मिल के मालिक ने कहा, ‘‘ वर्षों से अनियंत्रित भंडारण के कारण मिलें खरीद नहीं कर पा रही हैं। पश्चिम बंगाल ने सत्ता परिवर्तन के लिए मतदान किया है। जूट उद्योग की केवल यही अपेक्षा है कि इस बदलाव का सकारात्मक प्रभाव मई के अंत तक मिल के स्तर पर दिखे।’’

उद्योग से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि उपलब्ध फसल का बड़ा हिस्सा पहले ही भंडारण करने वालों ने ऊंची कीमतों पर खरीद लिया है जिससे सीजन के अंत में बाजार में केवल दो से तीन लाख गांठें ही उपलब्ध हैं।

जेबीए के सदस्य ओम सोनी ने कहा कि व्यापार गतिविधि और मानक दर के प्रकाशन के बंद होने के बाद बाजार लगभग निष्क्रिय हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ शून्य-भंडार आदेश दोधारी तलवार है। इसका उद्देश्य जमा किए गए कच्चे पटसन को बाजार में लाना है लेकिन इससे मिलों को भी नुकसान हो रहा है और आपूर्तिकर्ता बढ़ती लागत, बकाया भुगतान एवं सख्त भंडारण नियमों के बीच फंस गए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी केवल यही मांग है कि सरकार इस आदेश को वापस ले या इसकी समयसीमा बढ़ाए, ताकि शेष कच्चा पटसन बाजार में आ सके और संघर्ष कर रही मिलें कुछ समय तक बंद होने से बच सकें।’’

आईजेएमए के पूर्व चेयरमैन संजय कजारिया ने कहा कि उद्योग को नई व्यवस्था के तहत अधिक संवेदनशील नीति माहौल की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ‘‘ पटसन क्षेत्र पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार का स्वागत करता है। हम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ मिलकर कच्चे पटसन की आपूर्ति को स्थिर करने और उद्योग में आजीविका की रक्षा करने की दिशा में काम करने की उम्मीद करते हैं।’’

उन्होंने कहा कि ‘‘डबल इंजन’’ सरकार से उद्योग की अपेक्षा टकराव के बजाय स्थिरता एवं परामर्श पर केंद्रित है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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