नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) केंद्रीय बैंक के रेपा दर को 5.25 पर यथावत रखने से वैश्विक एवं घरेलू चुनौतियों के बीच व्यवसायों और निवेशकों को आवश्यक नीतिगत स्थिरता मिलेगी। उद्योग जगत ने जुड़े लोगों ने यह बात कही है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। महंगाई में नरमी, वृद्धि को लेकर चिंता दूर होने के साथ बजट में सरकारी खर्च में वृद्धि तथा अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बनी सहमति के बाद शुल्क को लेकर दबाव कम होने के बीच नीतिगत दर को यथावत रखने की उम्मीद की जा रही थी।
उद्योग मंडल एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद आरबीआई का यह कदम घरेलू मांग, उपभोक्ता भरोसे और निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूती देगा।
मिंडा ने कहा,’यह फैसला बदलते वैश्विक हालात में नीतिगत स्थिरता का संकेत देता है। महंगाई के संतोषजनक दायरे में बने रहने और वृद्धि की गति जारी रहने से आरबीआई का तटस्थ रुख व्यवसायों और निवेशकों के लिए आवश्यक भरोसा प्रदान करता है।’
मिंडा ने कहा कि यह विवेकपूर्ण मौद्रिक ढांचा बाजार विश्वास को मजबूत करेगा, विनिर्माण और व्यापार गतिविधियों को बढ़ावा देगा तथा भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को और सशक्त बनाएगा।
एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और राजकोषीय दबावों के बीच आरबीआई का यह संतुलित दृष्टिकोण समावेशी, स्थिर और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट की संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी लक्ष्मी वेंकटारमण वेंकटेशन ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्योग (एमएसएमई) ऋण पर रेपो दर का असर दिखता है इसलिए किसी भी तरह की सख्ती उधारी लागत बढ़ाती है, जबकि नरम मौद्रिक नीतियां निवेश को प्रोत्साहित करती हैं।
उन्होंने कहा कि भले ही इस बार रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की अतिरिक्त कटौती आदर्श होती, लेकिन पिछले 14 महीनों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती इस क्षेत्र के लिए सहायक साबित होगी।
वेंकटेशन ने कहा कि यह कदम उन सूक्ष्म उद्यमियों के लिए राहत लेकर आएगा, जो बेहद कम मुनाफे पर काम कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी कर्ज की लागत घटेगी, बल्कि नकदी प्रवाह में भी सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि मौजूदा नरमी का दौर पहली पीढ़ी के उद्यमियों और महिला उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ने और जोखिम लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
आनंद राठी ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री एवं कार्यकारी निदेशक सुजन हाजरा ने कहा, ‘मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है और तरलता को लेकर तटस्थ रुख बनाए रखा है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि रिजर्व बैंक फिलहाल स्थिति पर नजर रखते हुए देखो और इंतजार करो की नीति अपना रहा है।
आर्थिक अनुमानों पर टिप्पणी करते हुए हाजरा ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान में हल्का सुधार किया गया है, जो मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र में निरंतर गति को दर्शाता है।
भाषा योगेश अजय
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