कोलकाता, 10 अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार उद्योगों के लिए बड़े भूखंड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लैंड पूलिंग व्यवस्था अपनाने और अधिक औद्योगिक पार्क विकसित करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। राज्य में सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों के बाद भूमि अधिग्रहण राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सलाहकार सुभ्रत गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि सरकार बड़े भूखंड उपलब्ध कराने के लिए लैंड पूलिंग समेत विभिन्न विकल्पों का अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही औद्योगिक पार्कों के विकास पर भी अधिक जोर दिया जाएगा।
गुप्ता ने कहा, “लैंड पूलिंग उन विकल्पों में से एक है जिसका मूल्यांकन सरकार कर रही है। इसका उद्देश्य उद्योगों के लिए बड़े भूखंड उपलब्ध कराना और छोटे तथा बिखरे हुए भूखंडों से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है।”
उन्होंने बताया कि इस मॉडल के माध्यम से बड़े भूखंड जुटाना आसान होगा और सरकार को व्यक्तिगत भूमि स्वामियों के साथ सीधे लेन-देन में शामिल नहीं होना पड़ेगा।
गुप्ता ने कहा कि यदि सरकार लैंड पूलिंग व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लेती है, तो इसके लिए आवश्यक कानून लाया जाएगा।
लैंड पूलिंग व्यवस्था के तहत निजी स्वामित्व वाली छोटी और बिखरी हुई जमीनों का सीधा अधिग्रहण करने के बजाय उन्हें एक साथ मिलाकर नियोजित विकास किया जाता है। इसके बदले भूमि स्वामियों को विकसित भूखंड या अन्य लाभ दिए जाते हैं।
आंध्र प्रदेश में अमरावती के विकास के लिए करीब 29,000 किसानों से लगभग 33,000 एकड़ भूमि लैंड पूलिंग के जरिये जुटाई गई थी।
इस व्यवस्था से बड़े और एकीकृत भूखंड तैयार किए जा सकते हैं तथा शुरुआती भूमि अधिग्रहण की लागत कम हो सकती है।
पश्चिम बंगाल के मामले में लैंड पूलिंग सरकार को अलग-अलग भूखंडों का अधिग्रहण किए बिना बिखरे हुए भूमि स्वामित्व की समस्या दूर करने में मदद कर सकती है।
औद्योगिक पार्क मॉडल के तहत निजी विकासकर्ता जमीन एकत्र कर औद्योगिक इकाइयों के लिए तैयार भूखंड और साझा बुनियादी सुविधाओं वाले पार्क विकसित कर सकते हैं। इससे उन कंपनियों के लिए भी भूमि संबंधी समस्या दूर करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें बड़े और एकीकृत भूखंडों की आवश्यकता होती है।
गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार भूमि रखने और उसके उपयोग से जुड़े कानूनों में बदलाव की भी समीक्षा कर रही है।
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