चमड़ा, जूते-चप्पल का निर्यात 2026-27 में 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है : सीएलई चेयरमैन जुनेजा

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चमड़ा, जूते-चप्पल का निर्यात 2026-27 में 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है : सीएलई चेयरमैन जुनेजा

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 11:26 AM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 11:26 AM IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) ‘काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स’ (सीएलई) के चेयरमैन रमेश कुमार जुनेजा ने कहा कि देश से चमड़े, जूते-चप्पल और सहायक उत्पादों का निर्यात 2026-27 में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 5.5 अरब डॉलर पहुंच सकता है। साथ ही, अगले वित्त वर्ष में ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ व्यापार समझौतों के लागू होने से इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2025-26 में इन उत्पादों का निर्यात 4.89 अरब डॉलर रहा था।

सीएलई के चेयरमैन ने कहा कि ब्रिटेन को निर्यात अगले ढाई साल में एक अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल ब्रिटेन को हर साल 60-70 करोड़ डॉलर का निर्यात होता है।

भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई, 2026 को लागू हुआ। 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ इसी तरह का व्यापार समझौता अगले साल से लागू होने की उम्मीद है।

भारत-ब्रिटेन समझौते के तहत भारतीय चमड़े के उत्पादों और जूते-चप्पल को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिल रहा है। ईयू के साथ व्यापार समझौते के तहत भी घरेलू निर्यातकों को इसी तरह का शुल्क लाभ मिलेगा।

जुनेजा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमारे उत्पादों को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के उत्पादों की तुलना में कीमत के मामले में लाभ नहीं मिलेगा।’’

अमेरिका और ईयू भारत के इस क्षेत्र के कुल निर्यात में करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।

उन्होंने कहा कि यह श्रम-प्रधान क्षेत्र फिलहाल 44.2 लाख लोगों को रोजगार देता है और हाल में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के देशों, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड जैसे साझेदारों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच का लाभ उठाने की बेहतर स्थिति में है।

जुनेजा ने कहा कि इन एफटीए के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए परिषद विभिन्न राज्यों में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) निर्यातकों के लिए कार्यशालाएं और संगोष्ठी आयोजित करने जैसे कई कदम उठा रही है।

चेयरमैन ने क्षेत्र में उत्पादन, निर्यात और रोजगार बढ़ाने के लिए जिन चुनौतियों के समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए सरकार से एमएसएमई के लिए एकीकृत चमड़ा क्षेत्र विकास (आईडीएलएस) योजना फिर शुरू करने और तैयार चमड़े पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि परिषद देश में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के तरीकों पर भी ध्यान दे रही है।

दिल्ली स्थित निर्यातक और वर्सेटाइल ग्रुप के निदेशक मनुज सेठ ने भी सरकार से ‘पीयू फोम’ जैसे क्षेत्र के प्रमुख कच्चे माल पर आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाने का आग्रह किया।

सेठ ने कहा, ‘‘कच्चे माल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। मिसाल के तौर पर कुशनिंग में इस्तेमाल होने वाले पीयू फोम की कीमत मार्च से अब तक 35-40 प्रतिशत बढ़ गई है। ऐसे उत्पादों पर शुल्क कम करने से घरेलू विनिर्माताओं को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इससे निर्यात बढ़ाने और रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा