ठाणे, 16 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ स्कूल में पढ़ने का दावा करने वाले 81 वर्षीय व्यक्ति को जमीन विवाद में बड़ी राहत मिली है क्योंकि प्रधानमंत्री से मुलाकात के कुछ दिन बाद एक भाजपा विधायक से जुड़ी कंपनी इस जमीन विवाद से पीछे हट गई है।
महाराष्ट्र में ठाणे जिले के मीरा रोड निवासी असगरअली वोहरा के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में पढ़ाई की थी।
वोहरा ने आठ सितंबर को मोदी से मुलाकात कर पालघर जिले की एक जमीन को लेकर जारी विवाद की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की थी।
वोहरा ने कहा था कि मामला भायंदर ईस्ट के नवघर में 2,810 वर्ग मीटर के एक प्रमुख भूखंड से जुड़ा है, जिसे उन्होंने 1989 में खरीदा था। उनका आरोप था कि 2011 में दो कंपनियों ‘स्वयं बिल्डर्स’ और ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस’ ने इस जमीन पर कथित रूप से अतिक्रमण कर लिया।
उनका दावा था कि दोनों कंपनियां भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से संबंधित हैं।
अब घटनाक्रम में बड़ा बदलाव आया है और ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड’ इस मामले से पूरी तरह पीछे हट गई है।
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने मीरा भयंदर नगर निगम के सहायक नगर नियोजन निदेशक को एक पत्र सौंपकर भूखंड के लिए जारी अपना प्रमाणपत्र औपचारिक रूप से वापस कर दिया है।
कंपनी ने कहा कि उसने 13 जून 2019 को पंजीकृत दस्तावेज के जरिए भूखंड खरीदा था और 17 अप्रैल 2026 को निर्माण की अनुमति हासिल की थी, लेकिन जमीन के स्वामित्व को लेकर जारी विवाद के कारण अब वह यह अनुमति वापस कर रही है।
कंपनी ने नगर निगम से निर्माण अनुमति रद्द करने और इस परियोजना के लिए पहले जमा किए गए सभी शुल्क वापस करने का अनुरोध भी किया है।
कंपनी ने जमीन के मालिक पर उसकी ओर से थोपी गईं कानूनी अड़चनों को दूर करने की दिशा में भी कदम उठाया।
सूत्रों के अनुसार, नरेंद्र मेहता ने वोहरा के सहयोगी अजय ढोका के जरिए संपर्क किया, ताकि 2015 में दर्ज उस पुलिस शिकायत को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सके, जिसमें वोहरा और ढोका दोनों पर आपराधिक अतिक्रमण और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे।
पुलिस शिकायत वापस लेने और निर्माण अनुमति वापस करने की पुष्टि करने वाले आधिकारिक पत्र 16 सितंबर को होने वाली नगर निगम की सुनवाई से ठीक पहले संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए।
वोहरा ने आरोप लगाया था कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन को धोखाधड़ी से दोनों कंपनियों के बीच बांटने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि 2015 में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल सका था।
वोहरा ने कहा कि उन्हें भरोसा था कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद यह मामला सुलझ जाएगा। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि अब मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है और 16 सितंबर को नगर निगम के अधिकारियों ने दोनों कंपनियों के प्रबंधन को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया था।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और वरिष्ठ शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने प्रधानमंत्री मोदी और वोहरा की मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए विश्वास जताया था कि प्रधानमंत्री अपने ‘स्कूल के सहपाठी’ को न्याय दिलाएंगे।
भाषा शोभना वैभव
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