कानूनी जानकारों ने टाटा संस के चेयरमैन पद पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को ‘वैध’ बताया

कानूनी जानकारों ने टाटा संस के चेयरमैन पद पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को 'वैध' बताया

कानूनी जानकारों ने टाटा संस के चेयरमैन पद पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को ‘वैध’ बताया
Modified Date: September 24, 2026 / 08:57 pm IST
Published Date: September 24, 2026 8:57 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) टाटा संस के चेयरमैन पद पर एन. चंद्रशेखरन की तीसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति के निदेशक मंडल के फैसले को कई कानूनी जानकारों ने वैध बताया है। उनका कहना है कि कंपनी के उपनियमों में चयन समिति से जुड़ा प्रावधान नए चेयरमैन की नियुक्ति पर लागू होता है, मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति पर नहीं।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. एन. श्रीकृष्ण और न्यायमूर्ति उदय यू. ललित ने कहा है कि 17 सितंबर को चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर टाटा समूह के निदेशक मंडल के चेयरमैन द्वारा इस्तेमाल किया गया निर्णायक मत कंपनी के उपनियमों के तहत वैध था।

वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार ने भी अलग से दी गई राय में कहा है कि संबंधित प्रावधान के तहत चेयरमैन के निर्णायक मत की अनुमति है।

टाटा संस ने ये कानूनी राय 17 सितंबर के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर टाटा ट्रस्ट की तरफ से आपत्तियां जताए जाने के बाद ली हैं। टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ट्रस्ट का कहना है कि कंपनी के उपनियमों के तहत ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन जरूरी था और चेयरमैन का निर्णायक मत इस प्रावधान को दरकिनार नहीं कर सकता है।

न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण ने अपनी राय में कहा है कि बोर्ड की कार्रवाई धारा 121 के अनुरूप थी। उन्होंने कहा कि निदेशकों के मत बराबर होने की स्थिति में चेयरमैन के निर्णायक मत का इस्तेमाल किया जा सकता है और प्रावधान की ऐसी व्याख्या होनी चाहिए जिससे बोर्ड की कार्यवाही गतिरोध में न फंसे।

न्यायमूर्ति ललित का मत है कि प्रस्ताव पर मतदान करने वाले पांच बोर्ड सदस्यों में से चार ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के पक्ष में मतदान किया। टाटा ट्रस्ट के दो नामित निदेशकों में नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि वेणु श्रीनिवासन ने इसका समर्थन किया। धारा 104बी के तहत नियुक्त निदेशकों के मत बराबर होने के बाद चेयरमैन के निर्णायक मत से धारा 121 की शर्त पूरी हो गई। दो स्वतंत्र निदेशकों ने भी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।

इसके साथ ही, न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण ने कहा कि निदेशकों पर कंपनी के प्रति वैधानिक दायित्व और उन्हें नामित करने वाली संस्था के प्रति संविदात्मक दायित्व होते हैं। दोनों में टकराव होने पर कंपनी के प्रति वैधानिक दायित्व को प्राथमिकता मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस आधार पर वेणु श्रीनिवासन का चंद्रशेखरन के पक्ष में मतदान करना उचित था।

वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार ने अपनी राय में कहा है कि धारा 121 में चेयरमैन के निर्णायक मत का प्रावधान धारा 104बी के तहत नियुक्त निदेशकों के बीच मत बराबर होने या पूरे बोर्ड के मत बराबर होने की स्थिति में लागू हो सकता है।

उन्होंने कहा कि टाटा संस के उपनियमों की धारा 118 में चेयरमैन की नियुक्ति के लिए किसी व्यक्ति की सिफारिश करने को चयन समिति का प्रावधान है और इसमें ‘नए चेयरमैन के चयन’ की प्रक्रिया का उल्लेख है। ऐसे में यह प्रावधान मौजूदा चेयरमैन को एक और कार्यकाल दिए जाने की स्थिति में लागू नहीं होता है।

चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं। फरवरी, 2022 में बोर्ड ने उन्हें पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से पुनर्नियुक्त किया था। उनका प्रस्तावित तीसरा कार्यकाल फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद शुरू होगा।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


लेखक के बारे में