मुंबई, पांच मार्च (भाषा) महाराष्ट्र की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष (2025-26) में 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है। राज्य विधानसभा में बृहस्पतिवार को पेश 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में यह कहा गया।
बजट से पहले पेश आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राज्य का बाजार मूल्य पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2025-26 में 51 लाख करोड़ रुपये होने, जबकि स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीएसडीपी 28.82 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
सेवा क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देने वाला बना हुआ है। इस क्षेत्र का कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में लगभग 60 प्रतिशत योगदान है। वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं की अगुवाई में इस क्षेत्र में 2025-26 में लगभग नौ प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है।
समीक्षा में वर्ष के दौरान उद्योग क्षेत्र की वृद्धि 5.7 प्रतिशत और कृषि और संबद्ध गतिविधियों की वृद्धि 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
आर्थिक समीक्षा में 2024-25 के लिए राज्य के बाजार मूल्य पर जीएसडीपी का अनुमान 46.22 लाख करोड़ रुपये लगाया गया है, जबकि वास्तविक जीएसडीपी में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है।
कृषि क्षेत्र में 2025 में मानसून की अनुकूल परिस्थितियां देखी गईं। राज्य में मानसून की अवधि के दौरान सामान्य वर्षा का 109.1 प्रतिशत प्राप्त हुआ, जिससे कई क्षेत्रों में फसल उत्पादन को लाभ हुआ।
समीक्षा के अनुसार, 2024-25 में भारत के बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक है। यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राज्य के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।
इसमें कहा गया है कि 2025-26 के लिए राज्य की प्रति व्यक्ति आय 3,47,903 रुपये अनुमानित है, जो राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय 2,19,575 रुपये से काफी अधिक है।
राजकोषीय मोर्चे पर, 2025-26 में राज्य की राजस्व प्राप्तियां 5,60,964 करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जबकि राजस्व व्यय 6,06,855 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सरकार ने राजकोषीय दायित्व मानदंडों के अनुरूप, एक दशक से अधिक समय से राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के तीन प्रतिशत के भीतर बनाए रखा है।
समीक्षा कहती है कि महाराष्ट्र लगातार महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहा है और अक्टूबर, 2019 से मार्च, 2025 के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह में 31 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष राज्य बना रहा।
समीक्षा में कहा गया है कि सड़कों, मेट्रो प्रणाली, बंदरगाह, हवाई अड्डों और लॉजिस्टिक नेटवर्क सहित सभी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार जारी है। इससे राज्य की आर्थिक प्रतिस्पर्धी क्षमता मजबूत हुई है।
महाराष्ट्र में सभी राज्यों की तुलना में बैंक जमा (22.7 प्रतिशत) और सकल ऋण (27.8 प्रतिशत) में सबसे अधिक हिस्सेदारी है, जो इसके मजबूत वित्तीय परिवेश को बताता है।
समीक्षा में रोजगार संकेतकों में सुधार का भी जिक्र किया गया है, जिसमें बेरोजगारी दर 2023-24 में घटकर 3.3 प्रतिशत हो गई है, जबकि श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई है।
समीक्षा में कहा गया है कि बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश, नीतिगत सुधार और क्षेत्रीय विकास उपायों से महाराष्ट्र को भारत के एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस छह मार्च को विधानसभा में राज्य का 2026-27 का बजट पेश करेंगे।
भाषा रमण अजय
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