कोलकाता, एक जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 टन प्रीमियम किस्म के आम का निर्यात किया है और इस सत्र में निर्यात खेप के 100 टन का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टिट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (सीआईएसएच)-कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के प्रमुख दुष्यंत राघव ने कहा कि लगभग सात टन आम पहले ही पश्चिमी एशियाई देशों और तीन टन इटली के मिलान में भेजे जा चुके हैं।
राघव ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘अब तक ‘आम्रपाली’ आम निर्यात किए गया है। हमें अगले महीने में ‘वृंदावनी’, ‘फजली’ और ‘अश्विना’ किस्मों सहित 100 टन और निर्यात खेप भेजने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में कई देशों द्वारा प्रीमियम मालदा आम खरीदने की उम्मीद है।’’
राघव ने कहा कि विदेशों से मांग बढ़ने के बाद किसानों को घरेलू बाज़ार में बेहतर दाम मिल रहे हैं।
राघव की बात दोहराते हुए, बागवानी के उप-निदेशक, सामंत लायक ने कहा कि जीएपी बागों से पहले ही लगभग 10 टन आम निर्यात किए जा चुके हैं, और अगले महीने के लिए काफी ज्यादा मात्रा तैयार है।
निर्यात में आम्रपाली, लखनभोग और निर्यात-गुणवत्ता वाले अन्य आमों की खेप शामिल थी। अधिकारियों ने बताया कि इस निर्यात पहल को आईसीएआर-सीआईएसएच केवीके (मालदा), ज़िला प्रशासन, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात संवर्धन प्राधिकरण, जिला बागवानी कार्यालय और मालदा मैंगो मर्चेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मिलकर आगे बढ़ाया। इन सभी ने मिलकर अच्छी गुणवत्ता के उत्पादन, प्रमाणपत्र, लॉजिस्टिक और बाज़ार तक पहुचने की व्यवस्था की।
उन्होंने कहा कि इस पहल से मालदा आम के निर्यात की क्षमता बढ़ी है, किसानों के लिए बाजार का दायरा बढ़ा है और अंतरराष्ट्रीय बिक्री से उनकी आमदनी में सुधार हुआ है।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस सत्र में ‘हिमसागर’ और ‘लंगड़ा’ जैसी मालदा की मशहूर किस्मों का निर्यात नहीं हो सका, क्योंकि मौसम की वजह से ये निर्यात के लिए जरूरी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं।
भाषा राजेश राजेश अजय
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