पश्चिम एशिया संघर्ष की मार: मध्य प्रदेश के इत्र कारोबार पर संकट, निर्यात ऑर्डर हुए रद्द

पश्चिम एशिया संघर्ष की मार: मध्य प्रदेश के इत्र कारोबार पर संकट, निर्यात ऑर्डर हुए रद्द

पश्चिम एशिया संघर्ष की मार: मध्य प्रदेश के इत्र कारोबार पर संकट, निर्यात ऑर्डर हुए रद्द
Modified Date: March 20, 2026 / 09:01 pm IST
Published Date: March 20, 2026 9:01 pm IST

भोपाल, 20 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव का सीधा असर मध्य प्रदेश के पारंपरिक इत्र कारोबार पर पड़ा है। क्षेत्र में बिगड़ते हालात के कारण न केवल बड़े निर्यात ऑर्डर रद्द हो रहे हैं, बल्कि इत्र की बोतलों की आपूर्ति और कच्चे माल की उपलब्धता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

‘हाउस ऑफ हेरत परफ्यूम्स’ के सैयद मोहम्मद अल्तमश जलाल ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘बाजार की स्थिति काफी खराब है। विदेशी ऑर्डर रद्द होने की वजह से हमारे पास स्टॉक जमा हो गया है। आमतौर पर रमजान के महीने में इत्र की मांग बहुत अधिक रहती है, लेकिन इस बार हमें भारी नुकसान की आशंका सता रही है।’

उन्होंने बताया कि कन्नौज के गुलाब और ‘ऊद’ जैसे प्राकृतिक इत्र की इस मौसम में विदेशी बाजारों में जबरदस्त मांग रहती है। हालांकि, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस पूरे कारोबार की कमर तोड़ दी है।

जलाल के अनुसार, कारोबारी इस समय कांच की बोतलों की बढ़ती कीमतों से भी परेशान हैं। ये बोतलें गुजरात के कारखानों में बनती हैं, जो ईंधन के लिए एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) पर निर्भर हैं और मौजूदा संकट की वजह से इसकी आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इत्र के व्यापार में कांच की बोतलें सबसे अहम कड़ी हैं। यदि पश्चिम एशिया में यह तनाव लंबा खिंचा, तो आने वाले दिनों में कारोबार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

जलाल ने जानकारी दी कि वे जिन इकाइयों से इत्र और परफ्यूम खरीदते हैं, उनमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश के कन्नौज में स्थित हैं, जो इत्र का प्रमुख केंद्र है।

कन्नौज से जुड़े और ‘ओरिस्का’ ब्रांड के संस्थापक अब्दुल मुगीस फारूकी ने कहा, ‘अगर यह अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहती है, तो मेरे स्टार्टअप पर इसका बुरा असर पड़ेगा। हम अपने नए उत्पादों को बाजार में उतारने के आखिरी चरण में हैं, लेकिन मौजूदा हालात चिंताजनक हैं।’

इंदौर स्थित ”शिवम फॉर्मुलेशंस’ के शैलेन्द्र पाठक ने भी आगाह किया है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो कच्चे माल की कमी की समस्या और ज्यादा गहरा सकती है।

भाषा दिमो रवि कांत सुमित रमण

रमण


लेखक के बारे में