पश्चिम एशिया संघर्ष का असर दो महीने से अधिक नहीं रहेगाः सज्जन जिंदल
पश्चिम एशिया संघर्ष का असर दो महीने से अधिक नहीं रहेगाः सज्जन जिंदल
नागपुर, 23 मई (भाषा) जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने शनिवार को कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर दो महीने से अधिक नहीं रहेगा और उद्योगों के बड़े पूंजीगत व्यय के दम पर भारत की वृद्धि की कहानी जारी रहेगी।
भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) नागपुर के 10वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनकर आए जिंदल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उद्योग लंबी अवधि की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजीगत खर्च को लेकर अपनी उम्मीदों और निवेश पर पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभावों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत की औद्योगिक वृद्धि के लिए एक छोटा सा झटका है। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, हर कोई समझता है कि यह अस्थायी है। यह एक हफ्ते या एक महीने में, या अधिक-से-अधिक दो महीने में खत्म हो सकता है।’’
जिंदल ने कहा कि उद्योग बहुत लंबी अवधि के लिए योजनाएं बनाते हैं, जो कि 20, 25 या 50 साल तक की हो सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, भारत की वृद्धि की यात्रा जारी रहेगी। उद्योगों द्वारा भारी पूंजीगत खर्च किया जा रहा है। अब पूंजीगत खर्च की गति बढ़ रही है क्योंकि ज्यादातर कंपनियों के बहीखाते बहुत मज़बूत हैं।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विदेशी मुद्रा बचाने के आह्वान में उद्योगों की भूमिका पर पूछे गए सवाल पर जिंदल ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल ही विदेशी मुद्रा बचाने में मदद कर रही है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उन प्रमुख पहलों में से एक हैं जिन्हें जेएसडब्ल्यू ग्रुप, तेल आयात कम करने और ई-परिवहन की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ा रहा है।
जिंदल ने बताया कि उनका ग्रुप नागपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सेल और बैटरी बनाने पर काम कर रहा है।
गढ़चिरौली में जेएसडब्ल्यू के प्रस्तावित 2.5 करोड़ टन क्षमता वाले इस्पात संयंत्र के बारे में जिंदल ने कहा कि यह बड़ा इस्पात परिसर स्थापित करने के लिए एक स्वाभाविक जगह है, क्योंकि यह लौह अयस्क की खदानों के करीब है। ये खदानें नक्सलवाद के कारण कई वर्षों तक ‘बंद’ पड़ी थीं।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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