नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) उद्योग मंडल सीआईआई के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में लंबा खिंचने वाला संघर्ष, समुद्री आपूर्ति में बाधाएं और ऊंची ऊर्जा कीमतें भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं और देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर को 6.5 प्रतिशत से नीचे ला सकती हैं।
मेमानी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पैदा हुआ मौजूदा ऊर्जा संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है, तो यह भारत सहित पूरी दुनिया की आर्थिक वृद्धि के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन सकता है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, “यदि पश्चिम एशिया का यह संकट समय पर सुलझ जाता है, तो आर्थिक वृद्धि की रफ्तार फिर तेज हो सकती है और यह 6.5 से सात प्रतिशत के बीच रह सकती है। लेकिन यदि यह बहुत लंबे समय तक खिंचता है, तो वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है।”
हालांकि, उन्होंने माना कि जब तक पश्चिम एशिया का संकट समाप्त नहीं होता, तब तक जीडीपी वृद्धि और ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट आकलन करना कठिन है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और उनके भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव के बारे में मेमानी ने कहा, “विभिन्न कीमत स्तरों और उनके भारत की वृद्धि पर अलग-अलग प्रभाव के पर्याप्त उदाहरण मौजूद हैं। पिछले 10-12 वर्षों में, बीच-बीच में कुछ अवधियों को छोड़कर, तेल की कीमतें सामान्य रूप से संतुलित रही हैं और इससे भारत को मजबूत आर्थिक वृद्धि हासिल करने में मदद मिली है।”
उन्होंने कहा कि 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर की कोई भी कीमत आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करेगी, क्योंकि हम अभी तक अपनी मांग के ढांचे में पर्याप्त बदलाव नहीं कर पाए हैं।
आधिकारिक अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मेमानी ने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के रुख पर पूछे जाने पर कहा कि ब्याज दरों में निकट भविष्य में कमी की संभावना नहीं है।
उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को राहत देने के लिए सरकार से लक्षित उपाय करने की भी वकालत की।
उन्होंने सुझाव दिया, “मैं लक्षित उपायों के पक्ष में हूं, विशेष रूप से ऐसे कदमों के जो ऋण से जुड़ी समस्याओं के कारण एमएसएमई क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को दूर कर सकें।”
केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने आठ अप्रैल को सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था। समिति ने पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, रुपये में कमजोरी और व्यापार प्रवाह में बाधा से बढ़ी अनिश्चितता का भी उल्लेख किया था।
सीआईआई के अध्यक्ष ने कारोबार सुगमता और न्यायिक सुधारों में तेजी लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पिछले 12-18 महीनों में इन क्षेत्रों में सरकार ने सराहनीय काम किया है।
मेमानी ने कहा, “हमें विवादों की संख्या कम करने का तरीका ढूंढना होगा। साथ ही, यदि कोई विवाद होता है तो उसके शीघ्र समाधान की व्यवस्था भी होनी चाहिए…।’’
भाषा योगेश रमण
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