नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से भारत के शहरी गैस वितरण उद्योग (सीजीडी) की दैनिक बिक्री मात्रा निकट अवधि में आठ से 10 प्रतिशत तक घट सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, इस आपूर्ति बाधा का सबसे अधिक असर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात पर पड़ा है। यह गैस उद्योग की कुल जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत पूरा करती है जबकि बाकी की गैस घरेलू स्रोतों से आती है।
संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर एलएनजी की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार, ‘‘ कीमतों में बढ़ोतरी को अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की क्षमता शहरी गैस वितरण कंपनियों की लाभप्रदता को सहारा देगी। साथ ही मजबूत नकदी भंडार, सशक्त प्रायोजकों का समर्थन और अपेक्षाकृत सीमित कर्ज जैसी स्थितियां इन कंपनियों की ऋण-खंड को समर्थन दे सकती हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में लंबे समय तक बनी रहने वाली अनिश्चितता पर नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।’’
रिपोर्ट में सात सीजीडी कंपनियों का विश्लेषण किया गया जो पिछले वित्त वर्ष उद्योग की कुल बिक्री का लगभग 70 प्रतिशत संभालती थीं। इसमें पाया गया कि औद्योगिक एवं वाणिज्यिक पाइप से मिलने वाली गैस सबसे ज्यादा प्रभावित होगी क्योंकि यह आयातित एलएनजी पर ज्यादा निर्भर है।
रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग के अन्य दो खंडों यानी वाहनों में उपयोग होने वाली संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और घरेलू परिवारों को पाइपलाइन से मिलने वाली पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी-डी) की कुल बिक्री मात्रा में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव पड़ने के आसार हैं क्योंकि इनकी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मुख्य रूप से घरेलू प्राकृतिक गैस से पूरा किया जाता है।
सरकार ने भी इन खंडों को प्राकृतिक गैस आवंटन के लिए उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में नामित किया है। इसके लिए नौ मार्च को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत एक अधिसूचना जारी की गई है।
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक अंकित हखू ने कहा, ‘‘ मुख्य रूप से औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कटौती के कारण उद्योग की दैनिक बिक्री मात्रा में आठ से 10 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है।’
यह स्थिति तब भी बनी हुई है जब सरकार द्वारा शहरी गैस वितरण कंपनियों को समर्थन दिए जाने की संभावना है ताकि इन उपभोक्ताओं को होने वाली गैस आपूर्ति में कटौती को मौजूदा 40-50 प्रतिशत स्तर से कम किया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘ इस बीच भारत के गैस व्यापारी द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की घटती आपूर्ति की भरपाई के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहे हैं। हालांकि निर्यात बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति सीमित है और तत्काल सौदों की ऊंची कीमतें भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।’’
भाषा योगेश निहारिका
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