कर्ज न चुकाने वालों का आईबीसी का दुरुपयोग करना अर्थव्यवस्था के लिए घातक: मुंबई उच्च न्यायालय

कर्ज न चुकाने वालों का आईबीसी का दुरुपयोग करना अर्थव्यवस्था के लिए घातक: मुंबई उच्च न्यायालय

कर्ज न चुकाने वालों का आईबीसी का दुरुपयोग करना अर्थव्यवस्था के लिए घातक: मुंबई उच्च न्यायालय
Modified Date: March 19, 2026 / 04:30 pm IST
Published Date: March 19, 2026 4:30 pm IST

मुंबई, 19 मार्च (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने कर्ज न चुकाने वालों और गारंटी देने वालों द्वारा दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के प्रावधानों के दुरुपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने कहा कि कर्ज चुकाने की अवधि में छूट (मोरेटोरियम) का लाभ उठाकर कानूनी सुरक्षा की आड़ लेने की यह प्रवृत्ति देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

न्यायमूर्ति मनीष पितले और न्यायमूर्ति श्रीराम शिरसाट की पीठ ने बुधवार को दिए एक आदेश में कहा कि चूककर्ताओं की ऐसी रणनीतियां आईबीसी के मूल उद्देश्य को विफल करती हैं और सुरक्षित लेनदारों द्वारा उठाए गए कानूनी कदमों को पंगु बना देती हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग न्याय की विफलता का कारण बने, तो वह मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।

अदालत ने एक ‘चिंताजनक प्रवृत्ति’ की ओर इशारा करते हुए कहा कि जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले लोग सुरक्षित लेनदारों और नीलामी खरीदारों को (वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन और प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम) ‘सरफेसी अधिनियम’ के तहत कार्रवाई करने से रोकने के लिए आईबीसी का सहारा लेते हैं।

पीठ ने यह भी कहा कि अक्सर देखा गया है कि कर्जदार पूरी नीलामी प्रक्रिया के दौरान शांत रहते हैं और अंत में आईबीसी के तहत मिलीभगत वाली कार्यवाही शुरू कर देते हैं ताकि ऋण भुगतान पर रोक का दावा किया जा सके।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आईबीसी का उद्देश्य संपत्ति के मूल्य को अधिकतम करना और सभी हितधारकों के हितों को संतुलित करना था। लेकिन चूककर्ताओं द्वारा अपनाई जा रही ये रणनीतियां न केवल इस उद्देश्य को विफल कर रही हैं, बल्कि देश के व्यावसायिक माहौल और वित्तीय स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।

यह टिप्पणी रोझिना फिरोज हाजियानी और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। याचिकाकर्ताओं ने दक्षिण मुंबई की एक संपत्ति के लिए सफल नीलामी बोली लगाई थी, लेकिन कर्जदारों द्वारा राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में आईबीसी कार्यवाही शुरू करने के कारण ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) ने बिक्री पंजीकरण पर रोक लगा दी थी।

अदालत ने पाया कि वर्तमान मामले में नीलामी के बाद ‘बिक्री प्रमाणपत्र’ आईबीसी कार्यवाही शुरू होने से पहले ही जारी किया जा चुका था, इसलिए ऋण भुगतान पर रोक का इस बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। उच्च न्यायालय ने डीआरटी के आदेश को रद्द करते हुए बैंक को नीलामी और पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।

भाषा सुमित अजय

अजय


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