मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में मोबाइल डेटा 97 प्रतिशत सस्ता हुआ

मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में मोबाइल डेटा 97 प्रतिशत सस्ता हुआ

मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में मोबाइल डेटा 97 प्रतिशत सस्ता हुआ
Modified Date: June 10, 2026 / 08:12 pm IST
Published Date: June 10, 2026 8:12 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल के दौरान देश में इंटरनेट और डिजिटल संपर्क के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

सरकार के एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2014 में एक जीबी डेटा की कीमत जहां 269 रुपये थी, वहीं अब यह घटकर मात्र 8-10 रुपये रह गई है। यानी डेटा की लागत में करीब 97 प्रतिशत की कमी आई है।

इस सस्ते इंटरनेट का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिला है, जहां इंटरनेट उपयोग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे लोगों के लिए जानकारी, शिक्षा, रोजगार और विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।

दस्तावेज के मुताबिक, देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 2014 के लगभग 25 करोड़ से बढ़कर दिसंबर, 2025 तक 103 करोड़ हो गई है। वहीं ब्रॉडबैंड कनेक्शन की संख्या भी छह करोड़ से बढ़कर लगभग 100 करोड़ पर पहुंच गई है, जो करीब 17 गुना बढ़ोतरी है।

इसमें कहा गया है कि 103 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन देश में डिजिटल पहुंच और सस्ती इंटरनेट सेवाओं का प्रमाण हैं। बढ़ते इंटरनेट उपयोग ने ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार को गति दी है, जिससे रोजगार सृजन और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि को भी बल मिला है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की रिपोर्ट ‘एस्टिमेशन एंड मेजरमेंट ऑफ इंडियाज डिजिटल इकॉनमी’ के अनुसार, 2022-23 में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय आय में हिस्सा 11.74 प्रतिशत था। यह 31.64 लाख करोड़ रुपये (करीब 402 अरब डॉलर) के बराबर है।

रिपोर्ट में कहा गया है 2030 तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था समग्र अर्थव्यवस्था की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ेगी और राष्ट्रीय आय में इसकी हिस्सेदारी दोगुनी हो सकती है।

प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। स्वदेशी 5जी दूरसंचार उपकरणों से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण तक देश ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्ष 2014 में देश में कोई चिप निर्माण संयंत्र नहीं था, जबकि अब मोदी सरकार के दौरान 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।

मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। देश, जो कभी मोबाइल फोन का आयातक था, अब प्रमुख निर्यातकों में शामिल हो गया है। मोबाइल फोन निर्यात 2014 के 1,600 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो लगभग 163 गुना वृद्धि है।

इसके साथ ही मोबाइल विनिर्माण इकाइयों की संख्या 2014 के केवल दो से बढ़कर अब 300 से अधिक हो गई है।

आधार के विस्तार में भी बड़ी प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में जहां 61.01 करोड़ आधार कार्ड बनाए गए थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 144 करोड़ से अधिक हो गई है।

भाषा अजय

अजय रमण

रमण


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