मौद्रिक नीति समिति ने पश्चिम एशिया संकट के बीच रेपो दर को रखा स्थिरः आरबीआई ब्योरा

मौद्रिक नीति समिति ने पश्चिम एशिया संकट के बीच रेपो दर को रखा स्थिरः आरबीआई ब्योरा

मौद्रिक नीति समिति ने पश्चिम एशिया संकट के बीच रेपो दर को रखा स्थिरः आरबीआई ब्योरा
Modified Date: April 22, 2026 / 06:34 pm IST
Published Date: April 22, 2026 6:34 pm IST

मुंबई, 22 अप्रैल (भाषा) मौद्रिक नीति तय करने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्यों ने पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न अनिश्चितताओं और उसके मुद्रास्फीति पर प्रभाव को देखते हुए इस महीने की शुरुआत में ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया था।

अप्रैल की शुरुआत में हुई एमपीसी बैठक के बुधवार को जारी हुए ब्योरे से यह जानकारी मिली। एमपीसी मौद्रिक नीति के बारे में निर्णय करने वाली सर्वोच्च इकाई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में कहा था कि पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था को निर्यात, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, ऊंची ऊर्जा कीमतों, विदेशों से धनप्रेषण, अनिश्चितता और वैश्विक मांग में कमजोरी जैसे कई माध्यमों से प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के लंबा चलने से वैश्विक अनिश्चितताएं बढ़ी हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं और यह आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम एवं मुद्रास्फीति के लिए दबाव पैदा कर सकता है।

इस बैठक में आरबीआई गवर्नर ने कहा था, ‘यदि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो केंद्रीय बैंकों के लिए मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं को नियंत्रित करना और वृद्धि को संतुलित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।’

तीन-दिवसीय बैठक के बाद एमपीसी ने आठ अप्रैल को प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया।

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपये की कमजोरी और व्यापार प्रवाह में बाधा जैसी अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया।

इस बैठक में आरबीआई ने अपने मौद्रिक नीति के रुख को भी ‘तटस्थ’ बनाए रखने का फैसला किया था।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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