सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों की कमाई, नकदी प्रवाह पर दबाव की आशंकाः मूडीज

सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों की कमाई, नकदी प्रवाह पर दबाव की आशंकाः मूडीज

सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों की कमाई, नकदी प्रवाह पर दबाव की आशंकाः मूडीज
Modified Date: March 11, 2026 / 03:50 pm IST
Published Date: March 11, 2026 3:50 pm IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) रेटिंग एजेंसी मूडीज ने बुधवार को कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई तेजी का बोझ खुद वहन करने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) की कमाई और नकदी प्रवाह में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

मूडीज रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि अप्रैल, 2022 से पेट्रोल एवं डीजल के खुदरा दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं, जबकि इस दौरान वैश्विक तेल एवं गैस कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आया है।

एजेंसी के मुताबिक, सरकार के प्रभाव के कारण खुदरा ईंधन कीमतों में बढ़ी हुई लागत को समय पर उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया जा सकता। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में वृद्धि होने पर कंपनियों को अधिक लागत का बोझ खुद ही उठाना पड़ता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के करीब 90 प्रतिशत पेट्रोल पंप इन तीन कंपनियों के ही नियंत्रण में हैं, जिससे ईंधन कीमतों को स्थिर रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड नौ मार्च को बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, अगले ही दिन यह बड़ी गिरावट के साथ 90 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा नीचे आ गया। इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

मूडीज ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ती हैं तो कच्चे तेल की खरीद और रिफाइनिंग लागत बढ़ जाती है, जबकि पेट्रोल और डीजल की बिक्री कीमत उसी अनुपात में नहीं बढ़ती। इससे विपणन मार्जिन कम होता है और परिचालन नकदी प्रवाह कमजोर पड़ सकता है।

रिपोर्ट कहती है कि भारत के पास फिलहाल अपने शुद्ध तेल आयात के लगभग 74 दिन के बराबर कच्चे तेल का भंडार है।

मूडीज ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच अमेरिका ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिन की छूट दी है, जिससे आपूर्ति के विकल्प बढ़ सकते हैं।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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