समीक्षकों के सरसों का उत्पादन अधिक रहने के अनुमान से अधिकांश तेल-तिलहनों में गिरावट

Ads

समीक्षकों के सरसों का उत्पादन अधिक रहने के अनुमान से अधिकांश तेल-तिलहनों में गिरावट

  •  
  • Publish Date - February 26, 2026 / 09:25 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 09:25 PM IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) कुछ तेल-तिलहन समीक्षकों द्वारा सरसों का उत्पादन पिछले साल से अधिक होने का अनुमान जताने के बाद देश के तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों के दाम टूट गये और इसका हाजिर दाम, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे हो गया। सरसों के लड़खड़ाने के बाद बाकी तेल-तिलहनों के भाव भी प्रभावित हुए तथा सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन और बिनौला तेल जैसे बाकी तेल-तिलहनों के भाव में गिरावट देखी गई।

दूसरी ओर साधारण कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन और सोयाबीन तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में सुधार है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि कुछ समीक्षकों द्वारा सरसों का उत्पादन पिछले वर्ष से अधिक रहने का अनुमान जताने के बाद सरसों के हाजिर दाम लड़खड़ाते नजर आये और अधिकांश हाजिर बाजारों में इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 6,200 रुपये क्विंटल से नीचे 5,700-5,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास मंडराने लगा।

इन समीक्षकों ने मांग की कि सरकार को सोयाबीन की तरह ही किसानों को सरसों की कम दाम पर बिकवाली के लिए एमएसपी से जो अंतर है, उसका किसानों को भुगतान करना चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि सरकार के पास अब सरसों का 2-2.5 लाख टन के बीच स्टॉक बचा है। कृषि मंत्री ने कुछ राज्यों में सरसों की खरीद करने की बात कहीं है जो यथोचित है। इससे सरसों का सरकार के पास स्टॉक रहेगा और जरूरत पड़ने पर सरकार बाजार हस्तक्षेप भी कर पायेगी। इस साल सरसों का 16-17 लाख टन का स्टॉक होने के बावजूद सटोरियों ने सस्ते में खरीद करने के बाद सरसों के दाम को बढ़ाकर लगभग 7,000 रुपये क्विंटल और सरसों तेल के दाम को 170 रुपये किलो तक पहुंचा दिया था। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार को अपना पर्याप्त स्टॉक बनाकर रखना हितकारी हो सकता है। सरसों का कोई विकल्प भी होना संभव नहीं है।

सरसों के अधिक उत्पादन का अनुमान पूरे तेल-तिलहन बाजार के अनुकूल नहीं गया तथा बाजार धारणा बिगड़ने के कारण कई अन्य तेल-तिलहनों के दाम लुढ़कते नजर आये। खराब बाजार धारणा तथा प्रसंस्कृत तेल को लागत से नीचे दाम पर बेचने की वजह से सोयाबीन तेल, मलेशिया की गिरावट की वजह से पाम-पामोलीन तेल तथा कमजोर मांग के बीच बिनौला तेल के दाम टूट गये।

सामान्य कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन और कम उपलब्धता के बीच सोयाबीन तिलहन के दाम स्थिर रहे।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,400-6,425 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,950-7,425 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 17,000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,675-2,975 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,255-2,355 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,255-2,400 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 11,600 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,900 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,250 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,325-5,375 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,925-4,975 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय