लड़खड़ा चुकी है वैश्विक व्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग से मुंह नहीं मोड़ सकतेः पूर्व जर्मन चांसलर

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लड़खड़ा चुकी है वैश्विक व्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग से मुंह नहीं मोड़ सकतेः पूर्व जर्मन चांसलर

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 10:30 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 10:30 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने बृहस्पतिवार को बहुपक्षीय सहयोग की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि संरक्षणवाद के इस दौर में इससे मुंह मोड़ना कोई विकल्प नहीं हो सकता है।

इसके साथ ही मर्केल ने अमेरिका की अगुवाई में संचालित संरक्षणवादी व्यापार नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था पहले ही झटके खा चुकी है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर दबाव बढ़ रहा है।

मर्केल ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की स्मृति में आयोजित ‘डॉ. मनमोहन सिंह व्याख्यान’ के पहले संस्करण को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह व्याख्यान शृंखला मनमोहन सिंह ट्रस्ट ने आयोजित की।

वर्ष 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उनका परिवार इस ट्रस्ट का संचालन कर रहा है। कार्यक्रम में उनकी पत्नी गुरशरण कौर भी मौजूद थीं।

मर्केल ने ‘वैश्विक बदलाव के दौर में जर्मनी और भारत’ विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि दुनिया इस समय रूस-यूक्रेन युद्ध, व्यापार शुल्क और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव जैसी कई चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि यूरोप में रूस के यूक्रेन पर हमले से क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सिद्धांत को ठेस पहुंची है।

मर्केल ने अमेरिकी संरक्षणवादी व्यापार नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका कमजोर की जा रही है और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहयोग की पुरानी व्यवस्था की जगह अब ‘जिसकी ताकत, उसी का हक’ जैसी सोच लेती जा रही है।

मर्केल ने कहा, ‘‘यूरोप में रूस के यूक्रेन पर हमले के साथ ही क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ और दूसरे विश्व युद्ध के बाद स्थापित यूरोपीय व्यवस्था पर गंभीर आघात पहुंचा। इस तरह क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता के अधिकार को रौंदा गया है तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अवधारणा के रूप में बहुपक्षवाद दबाव में है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व व्यापार संगठन या पेरिस जलवायु समझौते जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों को कमजोर किया और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी खुले तौर पर सवाल उठाए या उसकी जगह एकतरफा कदमों को प्राथमिकता दी। इस तरह, सहयोग की पुरानी व्यवस्था की जगह अब ऐसी व्यवस्था ले रही है, जहां ‘जिसकी ताकत, उसी का हक’ वाली सोच, कानून के शासन पर हावी होती दिख रही है।’’

उन्होंने कृत्रिम मेधा (एआई) और सोशल मीडिया सहित नई प्रौद्योगिकियों के वैश्विक नियमन की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि यदि समय रहते नियमन नहीं हुआ तो बहुपक्षीय व्यवस्था जड़ हो सकती है।

उन्होंने कहा कि एआई जैसे क्षेत्रों में अग्रणी देश अपने-अपने नियम बना रहे हैं, ऐसे में साझा ढांचा तैयार करना चुनौतीपूर्ण होने के साथ अनिवार्य भी है।

पूर्व जर्मन चांसलर ने 2005 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते समय डॉ. सिंह द्वारा कही गई बात को याद किया कि “लोकतंत्र की असली परीक्षा संविधान में लिखी बातों से नहीं, बल्कि उसके जमीनी क्रियान्वयन से होती है।” उन्होंने कहा कि देशों को लोकतांत्रिक मूल्यों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब संरक्षणवादी व्यापार नीतियां आर्थिक वृद्धि को बाधित कर रही हों, तब मनमोहन सिंह की चेतावनियां और भी प्रासंगिक हो जाती हैं।

मर्केल ने बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने में पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा दिखाए गए मार्ग की सराहना की और उनके द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों को ‘साहसिक’ करार दिया।

उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में भारत ने कई वर्षों तक पांच प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल की है, जो उसके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक क्षमता को दर्शाती है।

मर्केल ने उम्मीद जताई कि यह आयोजन भारत-जर्मनी संबंधों को और मजबूत करने में योगदान देगा। उन्होंने याद किया कि दोनों देशों के बीच अंतर-सरकारी परामर्श की शुरुआत उनके और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुई थी।

इस कार्यक्रम में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एन. एन. वोहरा सहित कई हस्तियां मौजूद थीं।

कार्यक्रम की शुरुआत मनमोहन सिंह की पुत्री उपेंदर सिंह के स्वागत भाषण से हुई, जबकि उनकी दूसरी पुत्री दमन सिंह ने आभार व्यक्त किया।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय