सेबी ने प्रतिभूति लेनदेन कर की मांग वाले फर्जी नोटिस को लेकर निवेशकों को आगाह किया

Ads

सेबी ने प्रतिभूति लेनदेन कर की मांग वाले फर्जी नोटिस को लेकर निवेशकों को आगाह किया

  •  
  • Publish Date - February 26, 2026 / 10:16 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 10:16 PM IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को निवेशकों को अपने नाम से जारी किये जा रहे फर्जी नोटिस को लेकर सावधान किया। नोटिस में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) के भुगतान की मांग की जा रही है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि धोखेबाज नियामक के ‘लेटरहेड’ की जालसाजी करके फर्जी नोटिस भेज रहे हैं और बकाया एसटीटी राशि के भुगतान का अनुरोध कर रहे हैं।

सेबी ने बयान में कहा, ‘‘नियामक के संज्ञान में आया है कि कुछ जालसाजों ने वित्त अधिनियम, 2004 के तहत प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) के अनुपालन की मांग करते हुए नोटिस जारी किये हैं।’’

नियामक ने कहा कि निवेशकों को सूचित किया जा रहा है कि ये नोटिस सेबी ने जारी नहीं किये हैं।

इसमें कहा गया, ‘‘यह सूचित किया जाता है कि शेयर बाजारों पर निष्पादित प्रतिभूतियों के प्रत्येक खरीद और बिक्री लेनदेन पर एसटीटी लगाया जाता है और ब्रोकर द्वारा कर एकत्र किया जाता है।’’

सेबी ने स्पष्ट किया कि वह एसटीटी राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी नहीं करता है और न ही इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ समन्वय करता है।

नियामक ने सेबी अधिकारियों की पहचान का प्रतिरूपण करने वाले धोखेबाजों या निवेशकों को धोखा देने के लिए बाजार नियामक के प्रतीक चिन्ह, मुहर या लेटरहेड का दुरुपयोग करने के मामलों के खिलाफ भी चेतावनी दी।

बयान के अनुसार, ऐसे व्यक्ति सेबी के नाम पर जाली पत्र, ईमेल या नोटिस भेजकर भोले-भाले निवेशकों को इन फर्जी खातों में पैसे अंतरित करने के लिए कह रहे हैं, जिससे निवेशकों को वित्तीय नुकसान हो रहा है।

इसमें कहा गया, ‘‘…लोगों से आग्रह है कि वे सावधानी बरतें और सेबी की ओर से सूचना या भुगतान की मांग करने वाले पत्रों/नोटिस की प्रामाणिकता की जांच करें।’’

सेबी ने एक अलग बयान में, निवेशकों को उन धोखेबाजों से सावधान किया जो खाता संचालक या कोष प्रबंधक बनकर शेयर बाजार में जोखिम-मुक्त लाभ का वादा करते हैं।

नियामक ने कहा कि ये संस्थाएं पोर्टफोलियो या खाता प्रबंधन सेवाएं प्रदान करने का दावा करती हैं और अक्सर निवेशकों के ट्रेडिंग खाते की जानकारी मांगती हैं, साथ ही मुनाफे का एक हिस्सा भी वसूलती हैं। हालांकि, नियामक ने कहा कि नुकसान पूरी तरह से निवेशकों को ही उठाना पड़ता है।

भाषा रमण अजय

अजय