एमआरएआई ने एल्युमिनियम स्क्रैप पर लगे 2.5 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने की मांग की
एमआरएआई ने एल्युमिनियम स्क्रैप पर लगे 2.5 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने की मांग की
नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) पुनर्चक्रण उद्योग ने सरकार से एल्युमिनियम कबाड़ यानी स्क्रैप पर लगने वाले 2.5 प्रतिशत शुल्क को समाप्त करने की मांग की है।
मटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) ने कहा कि शुल्क हटाने से पुनर्चक्रण और एल्युमिनियम आधारित विनिर्माण उद्योग की लागत कम करने में मदद मिलेगी तथा वे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
एमआरएआई ने कहा है कि औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए देश आयातित एल्युमिनियम स्क्रैप पर निर्भर बना हुआ है।
एमआरएआई ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजे पत्र में अनुरोध किया है कि एल्युमिनियम कबाड़ पर मौजूदा 2.5 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) को खत्म किया जाए।
पत्र में कहा गया, ‘‘भारत वर्तमान में अपनी औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एल्युमिनियम कबाड़ के करीब 80 से 85 प्रतिशत आयात पर निर्भर है।’’
एमआरएआई ने कहा कि भारत में द्वितीय एल्युमिनियम उत्पादन वित्त वर्ष 2015-16 में 8.5 लाख टन था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 22 लाख टन हो गया है। यह अब देश की कुल एल्युमिनियम खपत का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा है।
संगठन के अनुसार, यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब सात लाख लोगों को रोजगार देता है।
एमआरएआई के अध्यक्ष संजय मेहता ने कहा कि एल्युमिनियम कबाड़ पर 2.5 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क हटाने से हजारों सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मजबूत होंगे, रोजगार सृजित होगा, संसाधन सुरक्षा बढ़ेगी, विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग वाली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
भाषा यासिर अजय
अजय योगेश
योगेश

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