ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता के लिए बहु-तकनीकी नजरिया जरूरी: टोयोटा

ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता के लिए बहु-तकनीकी नजरिया जरूरी: टोयोटा

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  • Publish Date - January 11, 2026 / 12:56 PM IST,
    Updated On - January 11, 2026 / 12:56 PM IST

नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के अनुसार भारत की भौगोलिक विविधता और उभरती भू-राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए कारों में कई हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

कंपनी ने एक ‘बहु-तकनीकी नजरिये’ पर जोर देते हुए कहा कि भौगोलिक विविधता और उपभोक्ता स्वीकार्यता के कारण बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड, फ्लेक्स-ईंधन वाहन और हाइड्रोजन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों, सभी की अपनी भूमिका है।

जापान की टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन और भारत के किर्लोस्कर समूह के संयुक्त उद्यम वाली इस कंपनी ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन से निपटने के लिए एक बहु-तकनीकी नजरिये की आवश्यकता है, जिसे अकेले ईवी और हाइब्रिड हल नहीं कर सकते।

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के ‘कंट्री हेड’ और कार्यकारी उपाध्यक्ष विक्रम गुलाटी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”हमारे पास मौजूद विविधता, उपभोक्ता स्वीकार्यता की चुनौतियां, बुनियादी ढांचे की तैयारी और ऊर्जा मिश्रण को देखते हुए, मुझे लगता है कि कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण के मुद्दे से निपटने के राष्ट्रीय उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इन सभी तकनीकों की एक साथ आवश्यकता होगी।”

उन्होंने कहा कि एथनॉल कार्यक्रम और हाइड्रोजन मिशन जीवाश्म ईंधन के प्रतिस्थापन को बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देने के लिए सरकार की दो प्रमुख पहलें हैं। गुलाटी ने कहा कि स्थानीय प्रदूषण के मुद्दों को हल करने के लिए एथनॉल, सीबीजी (संपीड़ित बायोगैस) और हाइड्रोजन सहित कई तकनीकों को महत्वपूर्ण माना जाता है।

टोयोटा की भविष्य की राह के बारे में गुलाटी ने कहा, ”देश में टिकाऊ गतिशीलता का रास्ता ‘स्थानीयकरण’ के माध्यम से ही होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, ”जब उत्पादों की बात आती है, तो हमारे पास सभी तकनीकें हैं, चाहे वह ईवी की पूरी श्रृंखला हो या ‘स्ट्रॉन्ग’ हाइब्रिड, ‘प्लग-इन’ हाइब्रिड और यहां तक कि फ्यूल सेल वाहन। हमारे पास वैकल्पिक ईंधन वाले वाहन भी हैं।”

ईवी के बारे में उन्होंने विशेष रूप से कहा कि चार्जिंग अवसंरचना बढ़ने से देश भर में इसे अपनाने में तेजी आएगी।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय