नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) फेडरेशन ऑफ फ्रेट फॉरवर्डर्स एसोसिएशंस इन इंडिया (एफएफएफएआई) ने पश्चिम एशिया संकट के बीच शिपिंग कंपनियों के माल ढुलाई पर युद्ध जोखिम अधिभार (डब्ल्यूआरएस) लगाने के फैसले से उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है।
एफएफएफएआई ने बंदरगाह, नौवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा कि शिपिंग कंपनियों ने कुछ गंतव्यों के लिए और वहां से आने-जाने वाले माल पर युद्ध जोखिम अधिभार लगाना शुरू कर दिया है।
निकाय ने सरकारी हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए कहा कि कई मामलों में मांगा जा रहा अधिभार मूल रूप से तय समुद्री मालभाड़े से करीब दोगुना है जिससे व्यापार पर अप्रत्याशित एवं भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
एफएफएफएआई ने कहा, ‘‘ हम समझते हैं कि असाधारण भू-राजनीतिक परिस्थितियों में अतिरिक्त जोखिम ‘कवरेज’ की आवश्यकता हो सकती है लेकिन जिस तरीके से वर्तमान में ये अधिभार लगाए जा रहे हैं, उससे निर्यातकों एवं लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं के लिए काफी अनिश्चितता तथा परिचालन संबंधी कठिनाइयां खड़ी हो गई हैं।’’
एफएफएफएआई ने सोमवार को भेजे गए पत्र में कहा कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक भारतीय बंदरगाह से रवाना हुए जहाजों को मौजूदा स्थिति के कारण दूसरे भारतीय बंदरगाह पर माल उतारने के लिए मजबूर होना पड़ा।
निकाय ने मंत्रालय से अनुरोध किया कि वर्तमान परिस्थितियों में डब्ल्यूआरएस और उससे जुड़े परिचालन मुद्दों के कार्यान्वयन के लिए पारदर्शी दिशानिर्देश एवं समान मानक सुनिश्चित किए जाएं।
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