पुनर्नियुक्ति को लेकर नोएल टाटा से गतिरोध के बाद टाटा संस से अलग होंगे एन.चंद्रशेखरन

पुनर्नियुक्ति को लेकर नोएल टाटा से गतिरोध के बाद टाटा संस से अलग होंगे एन.चंद्रशेखरन

पुनर्नियुक्ति को लेकर नोएल टाटा से गतिरोध के बाद टाटा संस से अलग होंगे एन.चंद्रशेखरन
Modified Date: August 12, 2026 / 12:48 pm IST
Published Date: August 12, 2026 12:48 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) एन. चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद टाटा संस के चेयरमैन पद से हट जाएंगे।

इसके साथ ही टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ पुनर्नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के बाद भारत के सबसे प्रभावशाली कारोबारी समूहों में से एक के शीर्ष पर उनका करीब एक दशक का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।

टाटा समूह में 40 साल बिता चुके चंद्रशेखरन (63) ने बुधवार को कहा कि उन्होंने टाटा संस के निदेशक मंडल को सूचित कर दिया है कि 20 फरवरी, 2027 को उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। उन्होंने सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए निदेशक मंडल से जल्द उत्तराधिकारी तय करने को कहा है।

यह फैसला टाटा संस में उनके बने रहने को लेकर कई महीनों से जारी अनिश्चितता के बाद आया है। टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख (होल्डिंग) कंपनी और समूह की कंपनियों की प्रवर्तक है। परोपकारी ट्रस्ट के पास टाटा संस की कुल 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिससे टाटा ट्रस्ट को समूह के संचालन में महत्वपूर्ण प्रभाव हासिल है।

चंद्रशेखरन को आमतौर पर चंद्रा के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने की सिफारिश की थी। दोनों ट्रस्ट के पास मिलकर टाटा संस की 51.54 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

उन्होंने कहा कि इसके बाद टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति और निदेशक मंडल ने भी इस प्रस्ताव को दर्ज किया और इसकी सिफारिश की।

यह प्रस्ताव 24 फरवरी को निदेशक मंडल की बैठक में रखा गया था, लेकिन एक निदेशक के समर्थन न करने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।

प्रस्ताव का विरोध किसने किया, इसका नाम लिए बिना चंद्रशेखरन ने कहा कि सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण उन्होंने फैसला टालने का विकल्प चुना।

छह महीने बाद भी कोई फैसला नहीं हो पाने के बीच उन्होंने कहा कि नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता अब असहनीय हो गई है क्योंकि टाटा संस कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं पर काम कर रही है, जो अहम चरण में हैं।

गतिरोध को चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेदों से जोड़कर देखा गया है। रतन टाटा के निधन के बाद 2024 में नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन बने थे। खबरों के अनुसार, नोएल टाटा ने आश्वासन मांगा था कि टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा, जिस पर चंद्रशेखरन सहमत नहीं थे। मतभेदों में निदेशक मंडल में प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी शामिल था।

खबरों के मुताबिक, नोएल टाटा ने समूह की पांच साल की रणनीतिक योजना, टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए बिना शापूरजी पालोनजी समूह को बाहर निकलने का रास्ता देने और टाटा संस की लंबे समय से चली आ रही सूचीबद्धता की चर्चा पर चंद्रशेखरन के रुख को लेकर भी अधिक स्पष्टता मांगी थी।

इन तनावों से निदेशक मंडल का काम पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ। मई में हुई टाटा संस की एक बैठक को विचार-विमर्श से परिचित लोगों ने रचनात्मक बताया था। इसमें नोएल टाटा ने एयर इंडिया और बिगबास्केट समेत कारोबारों पर ध्यान दिया, जबकि चंद्रशेखरन ने समूह की कंपनियों की समीक्षा का नेतृत्व किया।

चंद्रशेखरन ने बुधवार को बयान में कहा, ‘‘मैंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 साल पूरे किए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का बेहद संतोषजनक अवसर मिलने के लिए मैं आभारी हूं।’’

टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख (होल्डिंग) कंपनी है। इसमें बहुलांश हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट की है और यह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया समेत समूह की 30 से अधिक कंपनियों को नियंत्रित करती है।

अपने मौजूदा कार्यकाल के 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया और इसकी सिफारिश की थी, जिसे टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति और निदेशक मंडल ने दर्ज किया और इसकी सिफारिश की। इसके बाद यह प्रस्ताव 24 फरवरी, 2026 को टाटा संस के निदेशक मंडल के समक्ष रखा गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, निदेशक मंडल के एक सदस्य के समर्थन न करने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका और सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण मैंने फैसला टालने का विकल्प चुना।’’

उन्होंने कहा, ‘‘निदेशक मंडल की उस बैठक को छह महीने हो चुके हैं और अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।’’

चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई रणनीतिक परियोजनाएं महत्वपूर्ण क्रियान्वयन चरण में हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘फरवरी 2027 के बाद केवल समूह का नेतृत्व करने के लिए एक नेता का होना जरूरी नहीं है, बल्कि नेतृत्व को लेकर स्पष्टता कर्मचारियों, निवेशकों, साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में मैंने आज इससे पहले टाटा संस के निदेशक मंडल को सूचित किया कि मैंने 20 फरवरी, 2027 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखने का फैसला किया है। मैंने निदेशक मंडल से जल्द उत्तराधिकार तय करने को कहा है ताकि उचित हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके।’’

चंद्रशेखरन 1987 में टाटा समूह से जुड़े और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में आगे बढ़ते हुए 2009 में इसके मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बने। 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उन्होंने साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद रतन टाटा के अंतरिम कार्यकाल के बाद यह पद संभाला था।

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने प्रौद्योगिकी, वाहन, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया। समूह ने सेमीकंडक्टर और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी बड़े निवेश किए।

टाटा की वेबसाइट के अनुसार, समूह में अब 31 कंपनियां हैं जो 100 से अधिक देशों में कारोबार करती हैं।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में