मुंबई, 15 अप्रैल (भाषा) ब्याज दरों में कमी के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की बैंक कर्ज पर निर्भरता बढ़ने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बुधवार को यह जानकारी दी।
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, बैंक ऋण की हिस्सेदारी चालू वित्त वर्ष के अंत तक बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में बढ़कर 43 प्रतिशत रहा था।
एजेंसी ने इस बदलाव का मुख्य कारण बैंक ऋण बाजार में कम ब्याज दरों को बताया है, जिसके चलते पूंजी बाजार के माध्यम से जारी होने वाले बॉन्ड में कमी आने की संभावना है।
एजेंसी ने कहा, ”पिछले वित्त वर्ष के दौरान जहां बैंक ऋण दरों में गिरावट जारी रही, वहीं बॉन्ड प्रतिफल पहली छमाही में गिरने के बाद दूसरी छमाही में बढ़ गया और अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।”
इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण निकट भविष्य में बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) की हिस्सेदारी भी कम रहने के आसार हैं।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रतिभूतियों से एनबीएफसी को संसाधन जुटाने में कुछ सहायता मिलने की उम्मीद है।
क्रिसिल की निदेशक मालविका भौतिका ने कहा कि अनिश्चित व्यापक आर्थिक वातावरण के कारण सरकारी प्रतिभूतियों और कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल के निकट भविष्य में ऊंचा बने रहने की उम्मीद है।
भाषा पाण्डेय अजय
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