नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ शुरू की गई कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) केवल उसी परियोजना तक सीमित रहनी चाहिए जिसमें चूक (डिफॉल्ट) हुई है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इसे कॉरपोरेट देनदार की अन्य परियोजनाओं तक नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
न्यायाधिकरण ने कहा कि किसी रियल एस्टेट कंपनी की सभी परियोजनाओं को दिवाला कार्रवाई के तहत लाना न तो चूक वाली परियोजना के घर-खरीदारों और न ही अन्य परियोजनाओं के हितधारकों के हित में है।
न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि यदि किसी विशेष परियोजना के घर के खरीदार धारा सात के तहत आवेदन करते हैं, तो सीआईआरपी उसी परियोजना तक सीमित रहेगी।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने यह फैसला नवीन एम रहेजा की अपील पर सुनाया है। चेयरपर्सन न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य (तकनीकी) बरुण मित्रा की एनसीएलएटी की पीठ ने कहा कि ऐसी परियोजनाएं जो संबंधित मामले से जुड़ी नहीं हैं, उनको सीआईआरपी में शामिल करना घर खरीदारों और अन्य हितधारकों के हित में नहीं है। पीठ ने स्पष्ट किया कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया संबंधित परियोजना तक सीमित रहनी चाहिए।
एनसीएलएटी ने पिछले महीने रहेजा डेवलपर्स की एक अन्य परियोजना पर आदेश पारित करते हुए यह व्यवस्था दी थी कि सीआईआरपी सिर्फ एक परियोजना ‘रहेजा शिलास’ तक सीमित रहेगी।
इसी सिद्धांत के आधार पर एनसीएलएटी ने कहा कि रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ मौजूदा दिवाला प्रक्रिया सिर्फ ‘कृष्णा हाउसिंग स्कीम’ तक सीमित रहेगा। यह पूरे समूह के खिलाफ नहीं है।
अंतिम आदेश जारी करते हुए एनसीएलएटी ने कहा कि रियल्टी कंपनी के खिलाफ परियोजना आधारित दिवाला प्रक्रिया के दौरान ऋणदाताओं और हितधारकों के दावे सिर्फ संबंधित परियोजना तक सीमित रहेंगे।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने समाधान पेशेवर को निर्देश दिया कि वह कृष्णा हाउसिंग स्कीम के हितधारकों को सीआईआरपी नियमन, 2016 के तहत 14 दिन के भीतर दावे देने को कहे।
भाषा अजय अजय
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