मुंबई, 12 अप्रैल (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष ने जहां ऊर्जा के मोर्चे पर भारत की ‘कमजोरी’ को उजागर किया है, वहीं यह वृद्धि के लिए जरूरी क्षेत्रों में सुधार शुरू करने और उद्योग के लिए बिजली की दरें घटाने का अच्छा अवसर है। एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने यह बात कही है।
एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की बाहरी सलाहकार परिषद के सदस्य नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भविष्य की वृद्धि के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल सावधानी से करने की जरूरत है।
हाल ही में कोटक प्राइवेट बैंकिंग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मिश्रा ने कहा, ‘‘हमारे पास दुनिया की सबसे सस्ती ऊर्जा है। घरों और किसानों के लिए दुनिया की सबसे सस्ती बिजली है, और हमारे पास उद्योग और वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए दुनिया की सबसे महंगी बिजली है।’’
उन्होंने कहा कि कोई भी देश, जिसके पास ऊर्जा की कमी है, उसे सबसे पहले उसकी कीमत ‘ठीक’ करनी चाहिए जिससे भविष्य की वृद्धि का मार्ग सुनिश्चित हो सके।
मिश्रा ने कहा, ‘‘मैं सरकार से बार-बार कह रहा हूं कि देखिये, यह जरूरी है कि उद्योग को सस्ती बिजली मिले क्योंकि तब आप नौकरियां पैदा करते हैं। लोगों को मुफ्त बिजली देने के बजाय उन्हें बिजली के दाम देने में सक्षम बनाया जाए।’’ उन्होंने आगे कहा कि एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा पश्चिम एशिया संघर्ष ऊर्जा की सही कीमत तय करने का एक ‘बड़ा मौका’ है।
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