एथनॉल मिश्रित पेट्रोल वाहनों के लिए व्यापक ढांचा खड़ा करने की जरूरतः मारुति सुजुकी सीईओ

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एथनॉल मिश्रित पेट्रोल वाहनों के लिए व्यापक ढांचा खड़ा करने की जरूरतः मारुति सुजुकी सीईओ

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  • Publish Date - June 4, 2026 / 04:05 PM IST,
    Updated On - June 4, 2026 / 04:05 PM IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिसाशी ताकेउची ने बृहस्पतिवार को कहा कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (फ्लेक्स-फ्यूल) से चलने वाले वाहन कच्चे तेल के आयात में कमी और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनके लिए व्यापक ढांचा विकसित करना होगा।

फ्लेक्स-फ्यूल ऐसा ईंधन होता है जिसमें पेट्रोल के साथ एथनॉल (या कभी मेथनॉल) मिलाया जाता है और इसका अनुपात बदल सकता है। सामान्य गाड़ियां एक तय मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए ही बनी होती हैं, जबकि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन के हिसाब से खुद को ढाल लेते हैं।

ताकेउची ने मारुति सुजुकी के पहले फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ‘वैगन आर फ्लेक्स-फ्यूल’ की पेशकश के मौके पर कहा कि भारत के लिए दीर्घकाल तक आयातित कच्चे तेल पर निर्भर रहना विकल्प नहीं हो सकता और देश को ऐसे समाधान अपनाने होंगे जो स्वच्छ, किफायती और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकें।

ताकेउची ने कहा, ‘कंपनी ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार पेश कर इस दिशा में पहल की है और हम तेल विपणन कंपनियों एवं अन्य हितधारकों से इस दिशा में सहयोग का आह्वान करते हैं।’

उन्होंने कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल देश की आयात निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के दोनों प्रमुख उद्देश्यों को पूरा करता है। लेकिन इसके व्यापक इस्तेमाल के लिए ईंधन उपलब्धता, वाहन मॉडलों की संख्या, उपभोक्ता जागरूकता और कीमत जैसे पहलुओं पर काम करना होगा।

ताकेउची ने कहा कि मारुति सुजुकी इलेक्ट्रिक वाहन, मजबूत हाइब्रिड और सीएनजी के रूप में बहु-मार्गी रणनीति पर काम कर रही है। इसके साथ ही कॉम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और हाइड्रोजन जैसे ईंधन विकल्पों के इस्तेमाल पर भी शोध का काम जारी है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण