नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) सरकार के पास रिकॉर्ड 43 लाख टन दलहन का भंडार संभावित अल नीनो मौसमीय प्रभाव के कारण आपूर्ति में आने वाली किसी भी समस्या या कीमतों में बढ़ोतरी से निपटने के लिए एक रणनीतिक सुरक्षा कवच का काम करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने उद्योग मंडल फिक्की के एक कार्यक्रम के दौरान अलग से ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘हमें अभी इस भंडार को बाजार में निकालने की जरूरत नहीं है। अगर अल नीनो का असर होता है और इससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होती है, तो दलहन के इस सुरक्षित भंडार का इस्तेमाल किया जाएगा।’
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दालों का मौजूदा सुरक्षित भंडार मई 2025 में मौजूद 18 लाख टन के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है, जबकि मई 2024 में दर्ज 21 लाख टन से भी काफी अधिक है।
सरकार की खरीद नीति के कारण इस भंडार में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और उपभोक्ताओं को कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाना है।
अधिकारी ने भंडारण और निपटान को लेकर चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि दालें खराब न होने वाली वस्तुएं हैं और इन्हें दो से तीन वर्षों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून–सितंबर) के सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है और आने वाले महीनों में अल नीनो बनने की संभावना भी जताई है।
कृषि मंत्रालय पहले ही खरीफ फसलों पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार कर रहा है।
भाषा योगेश रमण
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