नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय उद्योगों पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित ‘स्मार्ट’ एवं मशीन से पढ़े जा सकने वाले मानक विकसित करने की योजना बना रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
मशीन-पठनीय मानक ऐसे डिजिटल नियमों में बदल दिए जाते हैं जिन्हें कंप्यूटर प्रणाली सीधे ही समझ सके। इससे कंपनियां बिना मानवीय प्रक्रिया के स्वत: अनुपालन की जांच कर सकेंगी।
वहीं, स्मार्ट’ (मानक मशीन-सुलभ, पठनीय और हस्तांतरणीय) प्रारूप इससे एक कदम आगे हैं, जो लगातार अद्यतन होते रहते हैं और सॉफ्टवेयर एवं विनिर्माण प्रक्रियाओं में सीधे एकीकृत किए जा सकते हैं।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने उद्योग मंडल फिक्की के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग देश के मानक परिवेश को आधुनिक बनाने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों, खासकर एआई, के उपयोग के तरीकों पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, “नई प्रौद्योगिकी, खासकर एआई, बड़े स्तर पर बदलाव ला रही हैं और चुनौतियां भी पैदा कर सकती हैं। लेकिन हमें यह समझना होगा कि इनका अपने लाभ के लिए किस तरह इस्तेमाल किया जाए।”
खरे ने कहा कि भारत अपने आर्थिक सफर के ‘परिवर्तनकारी चरण’ में है और ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य हासिल करने में गुणवत्ता की केंद्रीय भूमिका होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) एक पारंपरिक नियामक की भूमिका से आगे बढ़कर ‘सुविधा-प्रदाता’ के रूप में विकसित हो रहा है। सरकार निजी क्षेत्र में परीक्षण अवसंरचना को बढ़ावा दे रही है ताकि उद्योग विस्तार को समर्थन मिल सके और उपभोक्ता भरोसा बना रहे।
सचिव ने उद्योग जगत से मानक निर्धारण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार परीक्षण के पुराने तौर-तरीकों को हटाकर तेज और अधिक सटीक प्रक्रियाएं लागू करने पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “गुणवत्ता केवल विकास की एक राह नहीं है, बल्कि अपने आप में एक लक्ष्य भी है।”
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