नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को अधिकारियों, वैज्ञानिकों, किसानों, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं और ग्रामीण महिलाओं से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘शक्ति की सप्तधारा’ दृष्टिकोण को हकीकत में बदलने और भारत को एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए मिलकर काम करें।
यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि और किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि कृषि और खाद्य प्रसंस्करण इस दृष्टिकोण के मुख्य स्तंभ होंगे। उन्होंने सिर्फ उत्पादन बढ़ाने से आगे बढ़कर गुणवत्ता, सुरक्षा और वैश्विक मानकों का पालन करने पर जोर दिया।
मंत्री ने कहा कि बेहतर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के जरिये भारतीय कृषि उत्पादों को खेतों से वैश्विक बाजार तक ले जाना चाहिए, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उनके मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, चौहान ने कहा, ‘‘भारतीय कृषि को खेतों से वैश्विक बाजार से जोड़ना वक्त की मांग है।’’
चौहान ने कहा कि हर राज्य और जिले के लिए अलग-अलग कृषि रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए, जिसमें वहां की मिट्टी, जलवायु, पानी की उपलब्धता और फसल पद्धति को ध्यान में रखा जाए। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग का वैज्ञानिक तरीके से आकलन भी किया जाना चाहिए ताकि किसानों को ज्यादा बाजार क्षमता वाली फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
उन्होंने किसानों तक नई प्रौद्योगिकी पहुंचाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केंद्रों, राज्य सरकारों और अन्य संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की अपील की। उन्होंने कहा कि मशीनीकरण, कृत्रिम मेधा, बेहतर बीजों और आधुनिक कृषि तरीकों का ज्यादा इस्तेमाल उत्पादन और उत्पादकता दोनों को बढ़ा सकता है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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