नीति आयोग ने एमएसएमई के हरित बदलाव के लिए राष्ट्रीय एजेंसी के गठन की सिफारिश की
नीति आयोग ने एमएसएमई के हरित बदलाव के लिए राष्ट्रीय एजेंसी के गठन की सिफारिश की
नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) नीति आयोग ने वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के हरित ऊर्जा की ओर बदलाव को लागू करने के लिए बुधवार को राष्ट्रीय परियोजना प्रबंधन एजेंसी (एनपीएमए) के गठन की सिफारिश की।
देश के भीतर एमएसएमई क्षेत्र में करीब 6.9 करोड़ इकाइयां हैं, जिनमें से लगभग 6.86 करोड़ सूक्ष्म उद्यम हैं। कुल निर्यात में इनका योगदान 45.7 प्रतिशत है और यह क्षेत्र करीब 25 करोड़ लोगों को रोजगार देता है।
नीति आयोग ने ‘एमएसएमई के हरित रूपांतरण का खाका’ शीर्षक रिपोर्ट में कहा कि प्रस्तावित एनपीएमए एक स्वतंत्र परामर्श और सलाहकारी इकाई होनी चाहिए, जिसकी निगरानी एक अंतर-मंत्रालयी समिति के माध्यम से की जाए।
आयोग के मुताबिक, इस एजेंसी की भूमिका जमीनी स्तर पर हरित ऊर्जा रूपांतरण कार्यक्रम का क्रियान्वयन तेज करने की होगी और इसके लिए वह एक प्रभावी एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत एमएसएमई क्लस्टरों के साथ निकटता से काम करेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनपीएमए को अभिरुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के जरिये इच्छुक एमएसएमई संकुलों और औद्योगिक संघों की पहचान करनी चाहिए, जिसमें क्लस्टर चयन की प्रक्रिया और प्रस्तावित समाधान स्पष्ट रूप से बताए जाएं।
इसके साथ ही, एमएसएमई संकुलों को हरित बदलाव कार्यक्रम में भागीदारी के लिए ‘विशेष प्रयोजन वाली इकाई’ (एसपीवी) गठित करने का विकल्प भी दिया जाना चाहिए।
नीति आयोग ने एक अलग रिपोर्ट में सीमेंट क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने का खाका भी पेश किया। इसमें कोयले से होने वाली तापीय ऊष्मा की जगह शहरी ठोस अपशिष्ट से तैयार रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया है।
इसके अलावा, पूरक सीमेंट सामग्री (क्लिंकर विकल्प) के अधिक उपयोग और सीमेंट उद्योग में ‘कार्बन का संग्रहण, उपयोग एवं भंडारण’ (सीसीयूएस) को बड़े पैमाने पर अपनाने की सिफारिश भी की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन उपायों के जरिये भारतीय सीमेंट क्षेत्र 2070 तक अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 80-85 प्रतिशत तक की कमी ला सकता है।
नीति आयोग ने एल्युमिनियम क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने के लिए भी एक रिपोर्ट जारी की जिसमें इस क्षेत्र का कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए तीन-चरणीय रणनीति सुझाई गई है।
इसके तहत, अल्पावधि में 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित 24 घंटे उपलब्ध बिजली (आरई-आरटीसी) और ग्रिड कनेक्शन को अपनाना, मध्यम अवधि में 2030 से 2040 के बीच परमाणु ऊर्जा को अपनाना और दीर्घकाल में 2040 के बाद कोयला आधारित उत्पादन के साथ सीसीयूएस को एकीकृत करने का प्रस्ताव है।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण


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