लॉकडाउन पर कोई चर्चा नहीं, इसे लागू करने जैसे कोई हालात नहीं: सरकार
लॉकडाउन पर कोई चर्चा नहीं, इसे लागू करने जैसे कोई हालात नहीं: सरकार
नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत के पास पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का कम से कम दो महीने तक का पर्याप्त भंडार है और पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं के बावजूद लॉकडाउन लगाने की कोई संभावना नहीं है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत के पास करीब 60 दिन का तेल भंडार उपलब्ध है और एक महीने की एलपीजी आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया में युद्ध से उत्पन्न स्थिति पर संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है। इस पर विचार भी नहीं किया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर पेट्रोल पंप और एलपीजी वितरकों पर घबराहट में खरीदारी एवं लंबी कतारें गलत सूचना एवं अफवाहों के कारण देखी गई हैं।
शर्मा ने कहा, ‘‘ कोई संकट या कमी नहीं है। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल (पेट्रोल व डीजल जैसे ईंधन बनाने का कच्चा माल) है। पेट्रोल तथा डीजल का भंडार पर्याप्त है और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।’’
देशभर के सभी पेट्रोल पंप पर पर्याप्त भंडार है और वे सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। पेट्रोल या डीजल की कोई ‘राशनिंग’ नहीं की जा रही है।
तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि वैश्विक स्थिति भले ही लगातार बदल रही हो, लेकिन ‘‘ नागरिकों के लिए ईंधन, ऊर्जा एवं अन्य महत्वपूर्ण आपूर्तियों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हम उभरती चुनौतियों से निपटेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’’
पुरी ने कहा, ‘‘ भारत में लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह गलत हैं। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने लगातार अपनी मजबूती दिखाई है और सरकार समय पर, सक्रिय एवं समन्वित तरीके से कदम उठाती रहेगी।
पुरी ने कहा, ‘‘ ऐसे समय में यह महत्वपूर्ण है कि हम जिम्मेदार से काम करें, शांत एवं एकजुट रहें। ऐसी स्थिति में अफवाहें फैलाने और घबराहट उत्पन्न करने की कोशिशें गैर-जिम्मेदाराना और हानिकारक हैं।’’
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस की जरूरतों का आधा और एलपीजी की मांग का 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर करता है। कच्चे तेल का लगभग आधा, गैस का एक-तिहाई और एलपीजी का 85 से 90 प्रतिशत खाड़ी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। युद्ध के कारण यह मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया है जिससे आयातकों को आपूर्ति के लिए नए स्रोत तलाशने पड़े हैं।
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक एवं उपभोक्ता देश भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से बाधित कच्चे तेल की आपूर्ति की भरपाई पश्चिम अफ्रीका, लातिन अमेरिका और अमेरिका से खरीद बढ़ाकर की है। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ऑस्ट्रेलिया तथा अमेरिका से आ रही हैं जबकि एलपीजी की आपूर्ति अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से अनुबंधित की गई है। साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव शर्मा ने कहा कि उपलब्धता पर्याप्त है, जिसके कारण व्यावसायिक एलपीजी का आवंटन संकट से पहले के स्तर के 70 प्रतिशत तक बढ़ाने में सुविधा मिली है।
संकट के बाद एलपीजी आपूर्ति को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता दी गई थी और होटल व रेस्तरां जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए आपूर्ति शून्य कर दी गई थी। बाद में व्यावसायिक आपूर्ति को जरूरत के 20 प्रतिशत और फिर 50 प्रतिशत तक बहाल किया गया। साथ ही उपयोगकर्ताओं को वैकल्पिक पाइप से मुहैया कराई जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया जिसकी आपूर्ति में ऐसी कोई समस्या नहीं है।
उन्होंने कहा कि अब आवंटन को 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है और इसमें इस्पात, मोटर वाहन तथा वस्त्र जैसे प्रमुख उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है जबकि घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर तथा विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है।
शर्मा ने कहा कि अफवाहों के कारण हुई घबराहट में खरीदारी से बिक्री में अस्थायी बढ़ोतरी हुई लेकिन आपूर्ति पर्याप्त है एवं खुदरा केंद्र सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
घरेलू उपयोग तथा परिवहन के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है जबकि औद्योगिक आपूर्ति को सामान्य स्तर के लगभग 80 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है और शहर गैस अवसंरचना का विस्तार तेज गति से किया जा रहा है।
सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। 3,000 से अधिक छापे मारे गए हैं और 1,500 से अधिक एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं। साथ ही राज्यों से निगरानी और जन-संचार बढ़ाने को कहा गया है।
उन्होंने नागरिकों को घबराहट में खरीदारी से बचने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी। साथ ही पाइप से मुहैया कराई जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) और बिजली आधारित खाना पकाने जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया।
भाष निहारिका रमण
रमण

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