नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) नॉर्वे के 1.2 लाख करोड़ डॉलर के सरकारी संपत्ति कोष ने कथित वित्तीय अपराध से जुड़े जोखिमों का हवाला देते हुए अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) को अपने निवेश पोर्टफोलियो से हटाने का निर्णय लिया है।
दुनिया के सबसे बड़े सरकारी संपत्ति कोष का प्रबंधन करने वाले नॉर्जेस बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट ने अपनी वेबसाइट पर एजीईएल को पोर्टफोलियो से हटाई गई कंपनियों की सूची में शामिल किया।
फंड प्रबंधक ने इस निर्णय के लिए ‘गंभीर भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर वित्तीय अपराध’ को आधार बताया लेकिन इस संबंध में विस्तार से कुछ नहीं बताया।
कोष ने मई, 2024 में अदाणी समूह की एक अन्य कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड को भी अपने पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया था। उस समय इसके कार्यकारी बोर्ड ने कहा था कि कंपनी के खिलाफ युद्ध या संघर्ष की परिस्थितियों में व्यक्तियों के अधिकारों के गंभीर उल्लंघन में योगदान देने का ‘अस्वीकार्य जोखिम’ है।
एजीईएल में इस कोष ने जुलाई, 2020 में जब निवेश शुरू किया था, उस समय शेयर मूल्य 341 रुपये था। वर्तमान में इसका भाव 944 रुपये प्रति शेयर के आसपास है।
नॉर्जेस बैंक की तरफ से एजीईएल में लगभग 4.39 करोड़ डॉलर (करीब 400 करोड़ रुपये) की हिस्सेदारी बेचे जाने के उलट घरेलू म्यूचुअल फंडों ने 2025 की शुरुआत से अब तक लगभग 50 करोड़ डॉलर मूल्य के एजीईएल शेयर खरीदे हैं।
बाजार आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान घरेलू म्यूचुअल फंडों की हिस्सेदारी 0.3 प्रतिशत से बढ़कर तीन प्रतिशत हो गई है।
अदाणी ग्रीन एनर्जी की तरफ से नॉर्जेस बैंक के इस फैसले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है। हालांकि उद्योग सूत्रों ने कहा कि जीवाश्म ईंधन-आधारित कोष की तरफ से एक नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी के खिलाफ नकारात्मक धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है।
नॉर्वे के इस सरकारी संपत्ति कोष ने पहले भी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन, आईटीसी, कोल इंडिया, एनटीपीसी, लार्सन एंड टुब्रो और वेदांता लिमिटेड सहित कई भारतीय कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो से बाहर किया है। इसके लिए कोयला उत्पादन, पर्यावरणीय क्षति या अन्य कारणों का हवाला दिया गया।
खुद तेल एवं गैस क्षेत्र में सक्रिय यह कोष वर्ष 1998 से अब तक औसतन सालाना छह प्रतिशत रिटर्न दे चुका है जो दुनिया भर के सबसे कम रिटर्न में शामिल है।
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प्रेम रमण
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