भारत में प्रत्येक तीन में से एक पीसी उपयोगकर्ता ऑफलाइन साइबर हमलों का शिकार : रिपोर्ट

भारत में प्रत्येक तीन में से एक पीसी उपयोगकर्ता ऑफलाइन साइबर हमलों का शिकार : रिपोर्ट

भारत में प्रत्येक तीन में से एक पीसी उपयोगकर्ता ऑफलाइन साइबर हमलों का शिकार : रिपोर्ट
Modified Date: March 25, 2026 / 04:08 pm IST
Published Date: March 25, 2026 4:08 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) इंटरनेट से कटे होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपका कंप्यूटर सुरक्षित है; भारत में वर्ष 2025 के दौरान प्रत्येक तीन में से एक निजी कंप्यूटर (पीसी) उपयोगकर्ता स्थानीय स्तर पर होने वाले ‘ऑफलाइन’ साइबर हमलों का निशाना बना। साइबर सुरक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कैस्परस्काई ने मंगलवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी।

कंपनी ने बताया कि उसने जनवरी से दिसंबर, 2025 के बीच भारत में 6.46 करोड़ से अधिक स्थानीय साइबर घटनाओं का पता लगाया और उन्हें रोका।

ये हमले मुख्य रूप से यूएसबी और पेनड्राइव जैसे बाहरी उपकरणों के जरिये किए गए। इन स्थानीय साइबर खतरों के कारण भारत दुनिया के शीर्ष 80 सबसे अधिक प्रभावित देशों की सूची में शामिल हो गया है।

कैस्परस्काई सिक्योरिटी नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, देश में 29.8 प्रतिशत उपयोगकर्ता इन ऑफलाइन खतरों की चपेट में आए। इनमें ‘वर्म्स’ या खुद को फैलाने वाले घातक प्रोग्राम और ‘फाइल वायरस’ के जरिये होने वाले हमले सबसे अधिक रहे।

एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए कैस्परस्काई के प्रबंध निदेशक एड्रियन हिया ने कहा, ‘‘2025 में हमारे शोधकर्ताओं ने पाया कि हमलावर मैलवेयर डाउनलोड कराने के लिए माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और गूगल ड्राइव जैसे लोकप्रिय टूल की नकल कर रहे हैं, ताकि उपयोगकर्ताओं की बैंकिंग जानकारी और संवेदनशील व्यक्तिगत ब्योरा चुराया जा सके।’’

वैश्विक स्तर पर पासवर्ड चुराने वाले यानी गोपनीय जानकारी उड़ाने वाले खतरों में 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, जासूसी करने वाले ‘स्पाइवेयर’ यानी चुपके से निगरानी रखने वाले सॉफ्टवेयर की घटनाओं में भी 51 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

हिया ने विशेष रूप से एशिया प्रशांत क्षेत्र में उन ‘मैलिशियस फाइलों’ यानी घातक प्रोग्राम में भारी बढ़ोतरी की बात कही है, जिन्हें कंप्यूटर से गोपनीय डेटा यानी निजी जानकारी चुराने के लिए बनाया गया है।

भाषा सुमित अजय

अजय

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