मौजूदा खरीफ सत्र में धान की बुवाई का रकबा 3.7 प्रतिशत घटा, दलहन का क्षेत्रफल मामूली बढ़ा

मौजूदा खरीफ सत्र में धान की बुवाई का रकबा 3.7 प्रतिशत घटा, दलहन का क्षेत्रफल मामूली बढ़ा

मौजूदा खरीफ सत्र में धान की बुवाई का रकबा 3.7 प्रतिशत घटा, दलहन का क्षेत्रफल मामूली बढ़ा
Modified Date: September 8, 2026 / 06:35 pm IST
Published Date: September 8, 2026 6:35 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) मौजूदा 2026 के खरीफ सत्र में अबतक धान की बुवाई का कुल रकबा 421.82 लाख हेक्टेयर रहा है, जो एक साल पहले समान अवधि में 438.19 लाख हेक्टेयर था। इसमें 3.71 प्रतिशत की कमी मुख्य रूप से कर्नाटक और तेलंगाना में कम बुवाई क्षेत्रफल के कारण आई है।

सबसे बड़ी कमी कर्नाटक (4.28 लाख हेक्टेयर), आंध्र प्रदेश (1.91 लाख हेक्टेयर), तेलंगाना (3.61 लाख हेक्टेयर), झारखंड (1.38 लाख हेक्टेयर), उत्तर प्रदेश (1.84 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (1.75 लाख हेक्टेयर), तमिलनाडु (1.32 लाख हेक्टेयर) और महाराष्ट्र (1.15 लाख हेक्टेयर) में दर्ज की गई।

हालांकि, असम (52 हजार हेक्टेयर) और ओडिशा (29 हजार हेक्टेयर) में रकबा बढ़ा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अल-नीनो प्रभावित मानसून की आशंका के बावजूद धान की बुवाई में कमी कम हुई है, क्योंकि चावल उगाने वाले ज्यादातर राज्य अब सिंचाई पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। बारिश में देरी से निपटने के लिए वे कम समय में तैयार होने वाली किस्मों को अपना चुके हैं और सरकार द्वारा पक्की खरीद से उन्हें लगातार फायदा मिल रहा है।

खरीफ की मुख्य फसल धान की कटाई अक्टूबर से शुरू होगी। केंद्र ने इस खरीफ सत्र में उगाए गए धान के लिए 708.64 लाख टन की खरीद का लक्ष्य रखा है। सरकार के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक होने के कारण बुवाई क्षेत्र में मामूली कमी चिंता का विषय नहीं होनी चाहिए।

हालांकि, बड़ी चिंता दलहनों और तिलहन के रकबे को लेकर है, जिनकी घरेलू कमी को पूरा करने के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

दलहनों की बुवाई में सुधार हुआ है और चार सितंबर तक यह पिछले साल के 115.30 लाख हेक्टेयर के स्तर से बढ़कर 117.13 लाख हेक्टेयर हो गई है। अरहर की खेती का रकबा 44.93 लाख हेक्टेयर से थोड़ा बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि इसी दौरान उड़द का रकबा 22.46 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 25.15 लाख हेक्टेयर रहा। हालांकि, मूंग का रकबा 33.19 लाख हेक्टेयर रहा।

दलहनों की खेती के रकबे में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश (3.97 लाख हेक्टेयर), झारखंड (98 हजार हेक्टेयर) और तेलंगाना (90 हजार हेक्टेयर) में हुई।

दूसरी ओर, तिलहन का रकबा एक साल पहले के 193.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 191.99 लाख हेक्टेयर रह गया, जिसमें सोयाबीन का रकबा थोड़ा कम होकर 121.82 लाख हेक्टेयर रह गया।

मोटे अनाज में, ज्वार और बाजरा का रकबा थोड़ा बढ़कर क्रमशः 13.58 लाख हेक्टेयर और 64.86 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि मक्का की बुवाई घटकर 91.09 लाख हेक्टेयर रह गई।

वाणिज्यिक फसलों में, कपास का रकबा 109.17 लाख हेक्टेयर पर स्थिर रहा, जबकि जूट व मेस्टा का रकबा बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर हो गया।

कुल मिलाकर, सभी खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा 1,086.31 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 1,104 लाख हेक्टेयर था।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


लेखक के बारे में