संसदीय समिति की कृषि विभाग के लिए बजट आवंटन बढ़ाने की सिफारिश

संसदीय समिति की कृषि विभाग के लिए बजट आवंटन बढ़ाने की सिफारिश

संसदीय समिति की कृषि विभाग के लिए बजट आवंटन बढ़ाने की सिफारिश
Modified Date: March 16, 2026 / 08:16 pm IST
Published Date: March 16, 2026 8:16 pm IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने जलवायु परिवर्तन और बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि विभाग के लिए बजट आवंटन को बढ़ाने की सिफारिश की है।

कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी संसद की स्थायी समिति ने सोमवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग और किसान कल्याण से जुड़ी अनुदान मांगों पर अपनी रिपोर्ट पेश की।

समिति ने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर सब्सिडी देने और छोटे व सीमांत किसानों के बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की।

समिति ने सुझाव दिया कि खेती में कृत्रिम मेधा (एआई) प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाए, ताकि पानी, उर्वरक और अन्य कृषि संसाधनों का सही मात्रा में और बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया कि कृषि विभाग के लिए केंद्रीय बजट में आवंटन का हिस्सा लगातार घट रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 में यह केंद्र के कुल परिव्यय का 3.14 प्रतिशत, 2023-24 में 2.57 प्रतिशत, 2024-25 में 2.54 प्रतिशत, 2025-26 में 2.51 प्रतिशत और 2026-27 में 2.44 प्रतिशत रहा है।

इससे स्पष्ट है कि बजट में कृषि विभाग का हिस्सा लगातार कम हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में कृषि विभाग के लिए 1,30,561.39 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि 2024-25 में वास्तविक खर्च 1,29,933.47 करोड़ रुपये था। इस तरह दो वर्षों में केवल 627.91 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है, जो लगभग 0.5 प्रतिशत की नाममात्र बढ़ोतरी है और इसमें महंगाई को भी शामिल नहीं किया गया है।

समिति ने बताया कि 31 जनवरी 2026 तक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान के मुकाबले 79,233.42 करोड़ रुपये, यानी 64.37 प्रतिशत राशि ही खर्च हो पाई है। इससे संकेत मिलता है कि चालू वित्त वर्ष के शेष दो महीनों में विभाग को आवंटित धन का पूरा उपयोग करने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान 1,23,089.30 करोड़ रुपये है, जो मूल बजट अनुमान 1,27,290.16 करोड़ रुपये से 4,200.86 करोड़ रुपये कम है।

समिति ने विभाग से कहा है कि वह धन का उपयोग संतुलित और समयबद्ध तरीके से करे।

समिति ने यह भी कहा कि देश की 46.1 प्रतिशत कार्यशक्ति कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में काम करती है, लेकिन राष्ट्रीय आय में इस क्षेत्र का योगदान लगभग पांचवां हिस्सा ही है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह असमानता कृषि क्षेत्र की कमजोरियों को दर्शाती है और इसमें सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिक बजट मिलने से सरकार जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में बाधाएं और बाजार की अनिश्चितता जैसी समस्याओं से बेहतर तरीके से निपट सकेगी।

इससे खेती को केवल गुजर-बसर करने के साधन के बजाय लाभदायक और टिकाऊ कृषि व्यवसाय बनाने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2026-27 के बीच कृषि बजट में 6,561.38 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसी अवधि में केंद्र सरकार के कुल बजटीय परिव्यय में 14,02,406.34 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।

समिति ने यह भी कहा कि कृषि योजनाओं के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा किसानों और बीमा कंपनियों को भुगतान में चला जाता है, जिससे कृषि के आधुनिकीकरण और पूंजी निवेश के लिए कम धन बचता है।

समिति ने केंद्र सरकार से सिफारिश की है कि कृषि क्षेत्र में पूंजी, मानव संसाधन और संस्थागत ढांचे में निवेश को काफी बढ़ाया जाए, ताकि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में पूंजी निर्माण की दर 15 प्रतिशत से कम न हो।

भाषा योगेश अजय

अजय


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