पेंशन नियामक ने दीर्घकालिक बेहतर रिटर्न के लिए नई परिसंपत्ति श्रेणियों पर समिति गठित की

पेंशन नियामक ने दीर्घकालिक बेहतर रिटर्न के लिए नई परिसंपत्ति श्रेणियों पर समिति गठित की

पेंशन नियामक ने दीर्घकालिक बेहतर रिटर्न के लिए नई परिसंपत्ति श्रेणियों पर समिति गठित की
Modified Date: May 21, 2026 / 04:42 pm IST
Published Date: May 21, 2026 4:42 pm IST

(कुमार दीपांकर)

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने पेंशनधारकों के लिए बेहतर प्रतिफल (रिटर्न) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न परिसंपत्ति श्रेणियों को शामिल करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

पीएफआरडीए के चेयरमैन एस. रमण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ हमें ऐसी नई परिसंपत्तियों पर विचार करना होगा जो लंबे समय तक बिना अधिक उतार-चढ़ाव के निरंतर एवं स्थिर वृद्धि दे सकें… हम यह नहीं कर सकते कि एक वर्ष में बहुत अधिक प्रतिफल दिखे और अगले वर्ष वह गिर जाए। उस अस्थिरता से बचना जरूरी है।’’

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के अंतर्गत अंशधारकों की संख्या इस वर्ष 22 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में एनपीएस में कुल अंशधारकों की संख्या 2.17 करोड़ रही, जबकि कुल कोष 15.95 लाख करोड़ रुपये था।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमने एक समिति बनाई है जो विभिन्न परिसंपत्ति श्रेणियों को दीर्घकालिक रूप से शामिल करने पर काम कर रही है। हम दुनिया के पेंशन कोषों के अनुभव से सीख रहे हैं।’’

रमण ने भरोसा जताया कि इससे एक ऐसा संतुलित ढांचा तैयार होगा जिससे एनपीएस धारकों को स्थिर और लगातार बढ़ता हुआ रिटर्न मिल सकेगा।

न्यूनतम गारंटी पेंशन योजना के प्रस्ताव पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह अभी विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के लिए एकीकृत पेंशन प्रणाली की अवधारणा पर भी काम हो रहा है, जिसे एक गारंटीकृत योजना के रूप में आसानी से समझा जा सकता है।

गैर-सरकारी क्षेत्र में एनपीएस के विस्तार पर रमण ने कहा कि प्राधिकरण समाज के विभिन्न वर्गों को उनकी भविष्य की सुरक्षा के लिए जागरूक करने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमने कृषि क्षेत्र, किसान, छोटे उद्यमी और विभिन्न सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को शामिल किया है। स्वयं सहायता समूहों में भी कई लोग अब अपने व्यवसाय कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य लगभग 20-25 करोड़ लोगों तक पहुंचना है और उन्हें बचत के माध्यम से भविष्य की सुरक्षा के लिए प्रेरित करना सार्वजनिक जिम्मेदारी है।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय


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