नयी दिल्ली, 15 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को भारत की वृद्धि यात्रा के अगले चरण में ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकी को प्रमुखता देते हुए तेज सुधारों का आह्वान किया।
उन्होंने भारतीय कंपनियों से वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने का लक्ष्य रखने को कहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ानी होगी।
लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को पूरा नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा सुरक्षा समय की जरूरत है।’’
उन्होंने बिजली की बढ़ती मांग को चिप, कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा केंद्रों से जोड़ते हुए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया संकट के बाद दुनिया को ऊर्जा आपूर्ति में झटका लगने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा और आयातित तेल एवं गैस पर निर्भरता कम करने के लिए समुद्र में अन्वेषण तेज करने की बात कही।
उन्होंने चेताया कि कुछ देशों द्वारा संसाधनों और रणनीतिक समुद्री मार्गों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाना भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
उन्होंने विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भरता का आह्वान किया।
मोदी ने कहा कि भारत समुद्र में तेल और गैस की खोज भी तेज कर रहा है। इसके लिए पहले ‘नो-गो’ क्षेत्र घोषित किए गए समुद्र तट के 99 प्रतिशत हिस्से को अब अन्वेषण के लिए खोल दिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने उन 99 प्रतिशत क्षेत्रों को, जिन्हें पहले नो-गो क्षेत्र कहा जाता था, अब आगे बढ़ने वाले क्षेत्रों के रूप में खोल दिया है और अब हम समुद्र के भीतर अन्वेषण तथा नए भंडार खोजने के प्रयास में जुटे हैं।’’
नो-गो क्षेत्र’ का अर्थ है ऐसा क्षेत्र जहां तेल, गैस या अन्य प्राकृतिक संसाधनों की खोज और अन्वेषण की अनुमति नहीं होती।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम में तेजी लाने के लिए 85,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
मोदी ने कहा कि अधिक आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिए सेमीकंडक्टर भी महत्वपूर्ण हैं और देश अब अपनी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों की आपूर्ति के मामले में विदेशों पर निर्भर नहीं रह सकता।
उन्होंने कहा, ‘‘चाहे कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान हो, हमारे चिकित्सा उपकरण हों या परिवहन के साधन, हर चीज में चिप जरूरी है और ऐसी स्थिति बन गई है कि इस चिप के बिना दुनिया ठहर जाएगी।’’
प्रधानमंत्रील ने कहा कि तीन सेमीकंडक्टर संयंत्रों में उत्पादन शुरू हो चुका है और अगले सात-आठ वर्षों में पांच से आठ और संयंत्र शुरू हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि भारत पिछले 12 वर्षों में ‘फ्रेजाइल फाइव’ देशों से निकलकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है।
उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों को भी रणनीतिक प्राथमिकता बताते हुए कहा कि भारत उनकी खोज बढ़ा रहा है और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए जरूरी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दूसरे देशों के साथ समझौते कर रहा है।
घरेलू क्षमताओं पर यह जोर ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी कमजोरियों को कम करने और ऊर्जा, खनिज, चिप तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अधिक मजबूती लाने का प्रयास कर रहा है।
मोदी ने कहा, ‘‘भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं रहना चाहिए; हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि अगले पांच से सात वर्षों में वह हासिल करना होगा, जो पिछली कई दशकों में नहीं हो पाया। इसके लिए भारत की कार्य संस्कृति, सोच और काम पूरा करने की गति में बदलाव जरूरी होगा।
प्रधानमंत्री ने सात क्षेत्रों में विकास रणनीति की रूपरेखा भी पेश की। इनमें विनिर्माण, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, बुनियादी ढांचा एवं संपर्क, रक्षा, हरित एवं समुद्री अर्थव्यवस्था तथा भारत की व्यापक वैश्विक क्षमताएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि विनिर्माण में डिजाइन और कलपुर्जों से लेकर तैयार उत्पाद तक पूरी मूल्य श्रृंखला शामिल होनी चाहिए। भारतीय कंपनियों को लागत, गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर उत्पादन के मामले में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
मोदी ने कहा, ‘‘शून्य-दोष वाली सटीक विनिर्माण हमारी पहचान बननी चाहिए। गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और इसलिए हमारा मंत्र गुणवत्ता, गुणवत्ता, गुणवत्ता होना चाहिए।’’
उन्होंने सरकार और उद्योग जगत में सुधारों का भी आह्वान किया और कहा कि मौजूदा नीतियों और नियमों को भारत की भविष्य की महत्वाकांक्षाओं में बाधा नहीं बनने दिया जा सकता।
उन्होंने कहा, ‘‘हम अतीत की नीतियों और नियमों के साथ काम नहीं कर सकते। हमें भविष्य के सपनों के अनुसार नीतियां और नियम बनाने होंगे।’’
मोदी ने सुधारों को मजबूरी के बजाय दृढ़ विश्वास का विषय बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हम सुधार एक्सप्रेस पर सवार हो चुके हैं और आने वाले दिनों में भी हम सुधारों के अगले स्तर की ओर बढ़ेंगे।’’
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने की महत्वाकांक्षा के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती आर्थिक ताकत काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वह विकास को बनाए रखने के लिए जरूरी संसाधनों और प्रौद्योगिकियों को किस तरह सुरक्षित करता है।
मोदी ने कहा कि भारत को केवल बड़ा प्रौद्योगिकी बाजार बनने से आगे बढ़कर वैश्विक नवाचार केंद्र बनना होगा।
उन्होंने कृत्रिम मेधा, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स, डेटा केंद्रों और अगली पीढ़ी के संचार जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘आज एआई, क्वांटम, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स, डेटा केंद्रों का दौर है और एक पूरी तरह नया क्षेत्र खुल गया है। हमें देश को केवल दुनिया का बाजार नहीं बनाना है, हमें नवाचार का केंद्र बनना है।’’
उन्होंने कहा कि भारत को स्वदेशी 6जी प्रौद्योगिकी विकसित कर उसे दुनिया में पहुंचाना चाहिए और अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को दूसरे देशों तक ले जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल का प्रशिक्षण देने की योजना की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा से तेजी से प्रभावित हो रही अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने के लिए देश के युवाओं को तैयार करने की जरूरत है।
मोदी ने भारतीय कारोबार जगत से वैश्विक स्तर पर और बड़े लक्ष्य रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी कंपनियां तैयार करने का लक्ष्य रखना चाहिए जो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
उन्होंने कहा, ‘‘अगले दशक में फॉर्च्यून 500 की 50 कंपनियां भारत की क्यों नहीं हो सकतीं? क्या यह हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए?’’
उन्होंने भारत के बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी बड़ा लक्ष्य रखते हुए कहा कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में शामिल होना चाहिए।
मोदी ने कहा, ‘‘आज बैंकिंग क्षेत्र फल-फूल रहा है। दुनिया के शीर्ष बैंकों में किसी भारतीय बैंक का झंडा क्यों नहीं लहराना चाहिए? एक भारतीय बैंक भी शीर्ष बैंक होना चाहिए; शीर्ष पांच बैंकों में से एक भारतीय बैंक होना चाहिए।’’
उन्होंने इसी तरह भारतीय दवा कंपनियों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, परामर्श कंपनियों और लेखा कंपनियों के लिए भी वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का लक्ष्य रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की प्रौद्योगिकी कंपनियां दुनिया में शीर्ष पर होनी चाहिए—यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए।’’
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय