बिजली क्षेत्र के कर्मचारी विद्युत संशोधन विधेयक के खिलाफ 10 मार्च को हड़ताल पर जाएंगे
बिजली क्षेत्र के कर्मचारी विद्युत संशोधन विधेयक के खिलाफ 10 मार्च को हड़ताल पर जाएंगे
नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) बिजली क्षेत्र के अभियंताओं के संगठन एआईपीईएफ ने शुक्रवार को कहा कि देश के बिजली वितरण ढांचे को बदलने के उद्देश्य से प्रस्तावित कानून के विरोध में उससे जुड़े 27 लाख कर्मचारी 10 मार्च को काम का बहिष्कार करेंगे।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने एक बयान में कहा, बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 को संसद में पेश करने की सरकार की योजना को लेकर बिजली कर्मचारियों और अभियंतनाओं में सख्त नाराजगी है।
बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 के मसौदे में कई बिजली वितरकों को साझा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके एक ही क्षेत्र में काम करने की अनुमति देने का प्रावधान है। यह विधेयक सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं की सुरक्षा करते हुए और पांच साल के भीतर औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए क्रॉस-सब्सिडी को समाप्त करते हुए लागत-प्रतिबिंबित करने वाले शुल्क का भी प्रावधान करता है।
एआईपीईएफ के मुताबिक, 10 मार्च को देशभर के करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर काम का बहिष्कार कर सड़कों पर उतरेंगे।
यह निर्णय बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) की एक ऑनलाइन बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता एआईपीईएफ के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने की।
एआईपीईएफ ने कहा, एनसीसीओईईई ने बिजली मंत्रालय को भी पत्र लिखकर मांग की है कि ‘‘किसान विरोधी, उपभोक्ता विरोधी और कर्मचारी विरोधी बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 को संसद में पेश नहीं किया जाना चाहिए।’’
दुबे ने बयान में कहा कि बिजली मंत्रालय ने पहले विधेयक पर अंशधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की थीं और देश भर में बिजली क्षेत्र से जुड़े सभी महासंघों, ट्रेड यूनियनों और संगठनों ने इसका विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि अंशधारकों की टिप्पणियों को न तो सार्वजनिक किया गया है और न ही परामर्श के विवरण जारी किये गये हैं।
इसके बजाय, 30 जनवरी को, बिजली मंत्रालय ने एक कार्यसमूह का गठन किया और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन को शामिल किया, एक संगठन जो बिजली क्षेत्र के निजीकरण का खुले तौर पर समर्थन करता था। उन्होंने कहा कि कानून को अंतिम रूप देने के लिए इस तरह के संगठन को शामिल करना पूरी प्रक्रिया को पक्षपाती और असंवैधानिक बनाता है।
एआईपीईएफ के बयान के अनुसार, एनसीसीओईईई नौ मार्च को दिल्ली में एक बैठक करेगा और किसानों, गरीब उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों पर विधेयक के प्रतिकूल प्रभाव पर चिंताओं को साझा करने के लिए सभी राजनीतिक दलों के सांसदों को आमंत्रित करेगा।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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