चालू खाते घाटा से निपटने के लिए शुल्क वृद्धि के बजाय आयात पर मात्रात्मक अंकुश बेहतर: खुदरा विक्रेता
चालू खाते घाटा से निपटने के लिए शुल्क वृद्धि के बजाय आयात पर मात्रात्मक अंकुश बेहतर: खुदरा विक्रेता
मुंबई, 13 मई (भाषा) रत्न एवं आभूषण खुदरा विक्रेताओं ने बुधवार को कहा कि सोने-चांदी के आयात पर शुल्क बढ़ाने के बजाय मात्रात्मक अंकुश लगाना देश के चालू खाते के घाटे (कैड) को नियंत्रित करने का अधिक प्रभावी तरीका हो सकता है।
उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, आयात शुल्क बढ़ाने से अकसर घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ती हैं और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम प्रभावित होते हैं, जबकि आयात कोटा या लाइसेंस सीमा जैसे वैकल्पिक उपाय अधिक कारगर हो सकते हैं।
पीएनजीएस रेवा डायमंड ज्वेलरी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित मोदक ने कहा कि सरकार को आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय सोने-चांदी के आयात पर मात्रात्मक अंकुश लगाना चाहिए था।
उन्होंने कहा, ‘‘ मात्रात्मक अंकुश आयात में समग्र कमी लाने और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद कर सकते थे।’’
मोदक ने यह भी कहा कि लोगों के पास रखे पुराने सोने और चांदी को बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और इसके लिए प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए।
सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर बुधवार को 15 प्रतिशत कर दिया। प्लैटिनम पर कर 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी कर में बदलाव किए गए हैं।
इस बीच, आभूषण खुदरा कंपनी सेनको गोल्ड एंड डायमंड्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुवंकर सेन ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट बने रहने तक आयात शुल्क अधिक रहेगा। साथ ही, जब तक कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला स्थिर नहीं होती, कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंची बनी रहेंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिए संभव है कि लगभग एक वर्ष तक यह स्तर बना रहे। मात्रा के लिहाज से मांग पर 10-15 प्रतिशत असर पड़ सकता है लेकिन मूल्य के हिसाब से यह और अधिक रहेगा। उपभोक्ता हल्के वजन के आभूषण खरीदेंगे।’’
धीरसंस ज्वेलर्स के निदेशक राघव धीर ने कहा कि आयात शुल्क में संशोधन एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है और इससे आपूर्ति श्रृंखला में लागत बढ़ेगी, लेकिन यह उपभोक्ताओं के लिए सोने के उपयोग के तरीके पर पुनर्विचार का अवसर भी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम अपने ग्राहकों को पुराना सोना लाकर उसे नए आभूषण से बदलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही, हमारा मानना है कि यह उद्योग और सरकार के लिए एक मजबूत स्वर्ण मौद्रीकरण योजना को औपचारिक रूप देने का सही समय है।’’
उन्होंने कहा कि भारत के घरों में अनुमानित 25,000 टन सोना निष्क्रिय पड़ा है। यदि इसका एक हिस्सा भी विश्वसनीय और उपभोक्ता-अनुकूल कार्यक्रम के माध्यम से उपयोग में लाया जाए तो आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा पर दबाव घटेगा और घरेलू व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
मालाबार समूह के चेयरमैन एम. पी. अहमद ने कहा कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े निजी स्वामित्व वाले सोना भंडार में से एक है। फिर भी घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात पर काफी निर्भरता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ उचित नीतिगत समर्थन और संगठित आभूषण क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के साथ स्वर्ण मौद्रीकरण योजना निष्क्रिय पड़े सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है।’’
भाषा निहारिका अजय
अजय

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