आरबीआई की विदेशी मुद्रा अदला-बदली योजना पहले बंद करने की योजना नहींः गवर्नर मल्होत्रा
आरबीआई की विदेशी मुद्रा अदला-बदली योजना पहले बंद करने की योजना नहींः गवर्नर मल्होत्रा
मुंबई, पांच अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय बैंक की रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली योजना को समय से पहले बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह योजना आगे भी विदेशी मुद्रा का अच्छा प्रवाह आकर्षित करती रहेगी।
मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हमें अब तक इस योजना से विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह मिला है और आगे भी अच्छा प्रवाह बने रहने की उम्मीद है।”
आरबीआई ने जून महीने में रुपये के मूल्य में आई कमजोरी को देखते हुए सरकार के साथ मिलकर यह योजना शुरू की थी। अब तक इसके जरिये करीब 41 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं, जिसमें 36.25 अरब डॉलर के एफसीएनआर-बी जमा के अलावा 2.5 अरब डॉलर की विदेशी उधारी और 1.5 अरब डॉलर का बाहरी वाणिज्यिक कर्ज शामिल हैं।
विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) जमा योजना (एफसीएनआर-बी) सितंबर में समाप्त हो जाएगी, जबकि अन्य दो योजनाएं दिसंबर तक जारी रहेंगी। इस योजना के तहत मुद्रा हेजिंग की लागत भी आरबीआई स्वयं वहन कर रहा है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मूलभूत कारक मजबूत हैं और इस योजना से देश की बाहरी स्थिति और सुदृढ़ हुई है।
उन्होंने कहा कि हाल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 97 से मजबूत होकर 95 के स्तर तक आ गया है और वैश्विक तनाव कम होने पर इसमें और मजबूती आ सकती है। उन्होंने कहा कि आरबीआई केवल अत्यधिक अस्थिरता की स्थिति में ही मुद्रा विनिमय बाजार में हस्तक्षेप करता है।
इसके साथ ही मल्होत्रा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र की मजबूती पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिंचाई के विस्तार, कृषि मशीनीकरण, बेहतर बीजों और सहायक गतिविधियों के बढ़ने से कृषि क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक जुझारू हुआ है और अब वर्षा की कमी का असर कम पड़ता है।
उन्होंने कहा कि खेती पर दबाव होने की स्थिति में डेयरी एवं पशुपालन जैसी सहायक गतिविधियां ग्रामीण परिवारों की आय को सहारा देती हैं।
इस अवसर पर आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि पिछले 15 वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि सिंचित क्षेत्र के विस्तार और कृषि ऋण की बेहतर उपलब्धता के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती कई स्तरों पर बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि कृषि ऋण तक बेहतर पहुंच, मशीनीकरण और फसल एवं बीजों की गुणवत्ता में सुधार ने भी इस क्षेत्र को मजबूत किया है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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