आरबीआई गवर्नर महंगाई पर और स्पष्टता आने तक ब्याज दर स्थिर रखने के पक्ष में रहे: बैठक ब्योरा
आरबीआई गवर्नर महंगाई पर और स्पष्टता आने तक ब्याज दर स्थिर रखने के पक्ष में रहे: बैठक ब्योरा
मुंबई, 19 अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महंगाई के रुख पर अधिक स्पष्टता आने तक नीतिगत मोर्चे पर इंतजार करना बेहतर समझा। इसके कारण उन्होंने और मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के अन्य सदस्यों ने इस महीने की शुरुआत में नीतिगत दर रेपो को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया। बुधवार को जारी एमपीसी बैठक के ब्योरे में यह जानकारी दी गई।
गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी ने लगातार चौथी बार नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया। समिति ने यह देखने के लिए इंतजार करने का फैसला किया कि क्या अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा लागत में हुई बढ़ोतरी का असर व्यापक महंगाई दबाव के रूप में सामने आता है या नहीं।
ब्योरे के अनुसार, मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने, अनिश्चितता बढ़ने और अब तक मानसून के असामान्य रहने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि आपूर्ति पक्ष से जुड़े झटकों के मामले में मौद्रिक नीति में बदलाव तब जरूरी होता है, जब इसके कारण महंगाई व्यापक रूप लेने लगे, महंगाई संबंधी उम्मीदें अस्थिर होने लगें या महंगाई लंबे समय तक बनी रहे। उन्होंने कहा कि हालांकि जोखिम बने हुए हैं, लेकिन अभी तक इसके प्रमाण सीमित हैं।
मल्होत्रा ने कहा, ‘‘मैं नीतिगत दर में किसी भी बदलाव के लिए महंगाई के रुख को लेकर और अधिक स्पष्टता आने का इंतजार करना पसंद करूंगा। इसमें वास्तविक महंगाई के आंकड़ों का मौजूदा या इससे ऊंचे स्तर पर बने रहने, पूर्वानुमान और महंगाई के सामान्य होकर किस स्तर पर स्थिर होने की संभावना को देखना शामिल है।’’
आरबीआई गवर्नर ने खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के जोखिमों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि इन जोखिमों के कारण महंगाई व्यापक स्तर पर बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर इन जोखिमों के वास्तविक रूप लेने के संकेत मिलते हैं तो नीतिगत रुख को सख्त करने की जरूरत पड़ सकती है।’’
आरबीआई की डिप्टी गवर्नर और एमपीसी सदस्य पूनम गुप्ता ने भी कहा कि वैश्विक घटनाक्रम और मौसम संबंधी जोखिमों के कारण बनी अनिश्चितता को देखते हुए कुछ और समय तक स्थिति पर नजर रखना बेहतर विकल्प होगा।
उन्होंने कहा कि इससे मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के पूरी तरह स्पष्ट होने, यह समझने में मदद मिलेगी कि आपूर्ति पक्ष की महंगाई कितनी स्थायी हो रही है और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर भी अधिक स्पष्टता मिलेगी।
भाषा रमण अजय
अजय

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