अमेरिका के साथ व्यापार समझौता, महंगाई में नरमी से आरबीआई ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा

अमेरिका के साथ व्यापार समझौता, महंगाई में नरमी से आरबीआई ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा

अमेरिका के साथ व्यापार समझौता, महंगाई में नरमी से आरबीआई ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा
Modified Date: February 6, 2026 / 07:12 pm IST
Published Date: February 6, 2026 7:12 pm IST

(तस्वीर के साथ)

मुंबई, छह फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को उम्मीद के अनुरूप नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। महंगाई में नरमी, वृद्धि को लेकर चिंता दूर होने और अमेरिका एवं यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते होने के बीच नीतिगत दर को यथावत रखा गया है।

केंद्रीय बैंक की छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने का निर्णय लिया। इसके साथ ही आरबीआई ने अपने तटस्थ रुख को बरकरार रखा जिसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार पर दबाव कम हुआ है। समझौते के पहले चरण को अगले महीने तक अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने एमपीसी के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि बाहरी चुनौतियां बढ़ गई हैं, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का सफल समापन अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।

आरबीआई फरवरी, 2025 से रेपो दर में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। यह 2019 के बाद से सबसे आक्रामक कटौती है। दिसंबर में हुई पिछली बैठक में आरबीआई ने प्रमुख ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि और कम मुद्रास्फीति के साथ अच्छी स्थिति में है। मुद्रास्फीति संतोषजनक सीमा से नीचे बनी हुई है और इसका परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है।”

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर सहमति बनने से वृद्धि की रफ्तार लंबे समय तक बनी रहने की उम्मीद है।’’

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मुद्रास्फीति में नरमी है और मौजूदा नीतिगत दर उपयुक्त है। भविष्य में नीतिगत दर में बदलाव वृद्धि परिदृश्य और मुद्रास्फीति पर निर्भर करेगा।

एमपीसी की घोषणा के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘महंगाई दर विशेष रूप से कीमत वृद्धि का दीर्घकालीन रुख नरम है। यह हमारे अनुमान से भी काफी कम है। इसलिए, मुझे उम्मीद है कि नीतिगत दर लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहेंगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्या नीतिगत दर में और गिरावट आएगी, यह फैसला मैं एमपीसी पर छोड़ता हूं।’’

जमा पर नीतिगत प्रभाव के बारे में उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव धीमी गति से होता है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘इसमें सुधार हुआ है। हर नीतिगत बयान के बाद इसमें सुधार हो रहा है। हमें उम्मीद है कि इसमें और सुधार होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज वास्तविक ब्याज दर बहुत कम है। आने वाले समय में हम एक अनुकूल दौर में हैं।’’

मल्होत्रा ​​ने कहा कि व्यापार समझौते का जीडीपी वृद्धि में कितना योगदान होगा, इसका कोई आकलन नहीं किया गया है क्योंकि इसके विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिकी व्यापार समझौते सहित विभिन्न कारणों से हमने जीडीपी वृद्धि में 0.2 प्रतिशत जोड़े हैं।’’

चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति औसतन 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो केंद्रीय बैंक के पिछले अनुमान 2.0 प्रतिशत से अधिक है। लेकिन आरबीआई के चार प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से कम है।

केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को 7.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है।

आरबीआई ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.95 प्रतिशत कर दिया है जो पहले 6.75 प्रतिशत था। हालांकि आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष के अनुमान को अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया क्योंकि नई जीडीपी शृंखला इसी महीने जारी की जाएगी।

मल्होत्रा ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा करते हुए कहा कि आरबीआई गलत तरीके से बिक्री, ऋण वसूली और वसूली एजेंटों की नियुक्ति और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की देनदारी को सीमित करने से संबंधित तीन दिशानिर्देशों का मसौदा जारी करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘छोटे मूल्य की धोखाधड़ी वाले लेनदेन में हुए नुकसान के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति के लिए एक रूपरेखा लाने का प्रस्ताव है।’’

इसके अलावा, आरबीआई डिजिटल भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए संभावित उपायों पर एक चर्चा पत्र भी प्रकाशित करेगा। ऐसे उपायों में विलंबित ऋण और वरिष्ठ नागरिकों जैसे विशिष्ट वर्गों के उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) को बिना किसी गारंटी के कर्ज की सीमा को दोगुना कर 20 लाख रुपये करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए रीट (रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट) को कर्ज देने की अनुमति बैंकों को देने का भी प्रस्ताव रखा।

इसके अलावा, सार्वजनिक कोष और ग्राहक संपर्क से रहित और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्ति आकार वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को पंजीकरण की आवश्यकता से छूट देने का प्रस्ताव है।

कुछ एनबीएफसी के लिए 1,000 से अधिक शाखाएं खोलने के लिए पूर्व अनुमोदन लेने की जरूरत को भी समाप्त किया जाएगा।

मल्होत्रा ने वित्तीय बाजारों के लिए कहा कि आरबीआई स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के तहत निवेश के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की सीमा को हटाने का भी प्रस्ताव कर रहा है। वीआरआर के माध्यम से प्रतिभूतियों की प्रत्येक श्रेणी में निवेश सामान्य मार्ग के तहत संबंधित श्रेणी के लिए निवेश सीमा के अधीन होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक अनिश्चितताओं से घिरे चुनौतीपूर्ण बाहरी परिवेश के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था उच्च वृद्धि दर्ज कर रही है। मुद्रास्फीति में नरमी वित्तीय स्थिरता को बनाए रखते हुए वृद्धि को समर्थन देने का अवसर प्रदान करती है। हम अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने और वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक छह अप्रैल से आठ अप्रैल, 2026 को होगी।

भाषा रमण प्रेम

प्रेम


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