आरबीआई ने नीतिगत दर और तटस्थ रुख को रखा बरकरार, जोखिमों को लेकर सजग

आरबीआई ने नीतिगत दर और तटस्थ रुख को रखा बरकरार, जोखिमों को लेकर सजग

आरबीआई ने नीतिगत दर और तटस्थ रुख को रखा बरकरार, जोखिमों को लेकर सजग
Modified Date: August 5, 2026 / 07:11 pm IST
Published Date: August 5, 2026 7:11 pm IST

मुंबई, पांच अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच बुधवार को उम्मीद के अनुरूप प्रमुख नीतिगत दर रेपो को इस साल लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने के साथ ‘तटस्थ’ रुख को भी बरकरार रखा।

इसके साथ ही आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक का ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के रुख पर अगला फैसला आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

आरबीआई आर्थिक परिदृश्य को लेकर सतर्क भी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, वैश्विक घटनाक्रम और वैश्विक व्यापार नीतियों से जुड़े जोखिमों के कारण आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है।

मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य मध्यम अवधि में खुदरा महंगाई को चार प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लाना है।

आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया। इसके साथ ही आरबीआई ने ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा की बढ़ी लागत के साथ भविष्य में महंगाई के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता को लेकर इंतजार करने का विकल्प चुना।

इसके साथ आरबीआई ने अपने तटस्थ रुख को भी बरकरार रखा जिसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत किया गया है।

मल्होत्रा ने कहा कि निकट अवधि में खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है और यह वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। इसकी मुख्य वजह खाद्य और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी होगी, जिसके बाद महंगाई में नरमी आने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि महंगाई का दबाव अभी व्यापक स्तर पर नहीं फैला है। कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई (खाद्य और ईंधन की महंगाई को छोड़कर) अब भी नियंत्रित स्तर पर बनी हुई है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति को सख्त करने की तत्काल जरूरत नहीं है। आरबीआई महंगाई को अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लाने के लिए प्रतिबद्ध है और महंगाई के भविष्य के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता आने का इंतजार कर रहा है।’’

आरबीआई ने कहा कि अब तक महंगाई दबाव सीमित बना हुआ है। हालांकि, खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी के कारण महंगाई का दबाव व्यापक स्तर पर फैलने का जोखिम बना हुआ है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष और व्यापार तनावों के कारण बढ़ी वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि मजबूत बनी हुई है। घरेलू मांग में मजबूती, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों तथा मजबूत निर्यात से आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिल रहा है।

हालांकि, आरबीआई आर्थिक परिदृश्य को लेकर सतर्क भी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, वैश्विक घटनाक्रम और वैश्विक व्यापार नीतियों से जुड़े जोखिमों के कारण आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संघर्ष के तेजी से बदलते घटनाक्रम के कारण वैश्विक आर्थिक हालात और बाजार धारणा प्रभावित हो रही है। इन घटनाओं का असर भारत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के अनुमान पर पड़ा है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की वृहद-आर्थिक बुनियाद ऐसे वैश्विक झटकों से निपटने में मदद कर रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था को भविष्य के झटकों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनाने वाले कदम तेज करने का अवसर प्रदान करती है। आरबीआई आर्थिक मजबूती बढ़ाने वाली नीतियों को आगे भी लागू करता रहेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चाहे सतत आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना हो, उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करना हो, कीमतों की स्थिरता बनाए रखना हो या वित्तीय प्रणाली और मुद्रा की स्थिरता सुनिश्चित करनी हो, केंद्रीय बैंक अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।’’

आरबीआई ने कहा है कि बैंकों में अधिशेष नकदी की स्थिति बनी हुई है और वह पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना जारी रखेगा।

विदेशी क्षेत्र की स्थिति पर मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत का चालू खाता मजबूत बना हुआ है। इसे मजबूत सेवा निर्यात और विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे से समर्थन मिल रहा है।

उन्होंने विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमा योजना के संदर्भ में कहा कि पूंजी प्रवाह मजबूत बना हुआ है। सीमित अवधि वाली इस योजना के समाप्त होने तक धन प्रवाह के बेहतर बने रहने की उम्मीद है।

यह पूछे जाने पर कि चूंकि विदेशी पूंजी आकर्षित करने की लागत केंद्रीय बैंक वहन कर रहा है, ऐसे में क्या आरबीआई इस योजना को समय से पहले बंद करने पर विचार कर रहा है, मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

रुपये की मजबूती को लेकर उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी प्रवाह अधिक होने के बावजूद रुपये में अपेक्षित तेजी नहीं आई है। यदि वैश्विक तनाव कम होते हैं तो रुपये में और मजबूती आना संभव है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘आरबीआई का यह प्रयास होगा कि रुपये की गति व्यवस्थित और स्थिर बनी रहे।’’

मल्होत्रा ने यह भी कहा कि आरबीआई अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट जारी करने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कुछ देशों में पॉलिमर नोट का 30 वर्षों से अधिक समय तक चलने का रिकॉर्ड हैं। ये नोट खासतौर पर कम मूल्य वर्ग के नोटों के लिए उपयोगी होंगे, क्योंकि इनका इस्तेमाल और चलन अधिक होता है।

आरबीआई ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी अतिरिक्त उपायों की घोषणा की है। इनमें शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लाइसेंस दोबारा शुरू करने के लिए मसौदा दिशानिर्देश और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ऋण निगरानी व्यवस्था (सीएमए) से जुड़े संशोधित मसौदा निर्देश शामिल हैं।

इसके अलावा, ऋण पर ब्याज दरों में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों पर लागू ब्याज दर संबंधी नियामकीय रूपरेखा में एकरूपता लाने और उसे मानकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है।

मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक पांच से सात अक्टूबर को होगी।

भाषा रमण प्रेम

प्रेम


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