पश्चिम एशिया संकट के बीच मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर को यथावत रख सकता है आरबीआई
पश्चिम एशिया संकट के बीच मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर को यथावत रख सकता है आरबीआई
मुंबई, 31 मई (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा कीमतों में तेजी और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चुनौतियों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस सप्ताह अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर (रेपो दर) को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है। इसके अलावा केंद्रीय अपने सतर्क रुख पर भी कायम रहेगा।
आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक तीन से पांच जून तक होगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा पांच जून को नीतिगत निर्णयों की घोषणा करेंगे।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतों, कमजोर होते रुपये और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण आरबीआई अपने मुद्रास्फीति के अनुमान बढ़ा सकता है तथा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान में कटौती कर सकता है।
अप्रैल में आरबीआई ने पश्चिम एशिया संघर्ष के ऊर्जा आपूर्ति, महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर प्रभाव का आकलन करने के लिए ‘देखो और इंतजार करो’ का रुख अपनाते हुए रेपो दर को अपरिवर्तित रखा था।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक शोध विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा अस्थिर परिस्थितियों को देखते हुए जून की मौद्रिक नीति में यथास्थिति बनाए रखे जाने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अगले तीन तिमाहियों में पांच प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, जबकि चालू तिमाही में इसके चार से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.2 प्रतिशत तथा पूरे वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
बैंक ऑफ़ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने भी अगले सप्ताह रेपो दर या नीतिगत रुख में किसी बदलाव की संभावना से इनकार किया।
हालांकि, उन्होंने कहा कि आरबीआई का रुख सतर्क रहेगा और वह महंगाई अनुमान को लगभग पांच प्रतिशत तक बढ़ाने तथा जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर करीब 6.5 प्रतिशत कर सकता है।
आरबीआई ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि वह चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि और मुद्रास्फीति पूर्वानुमान प्रणाली की समीक्षा और उसमें सुधार करेगा।
क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि आरबीआई के रेपो दर को अपरिवर्तित रखने और तटस्थ नीति रुख बनाए रखने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में महंगाई का दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा है, जिसमें ऊंची ईंधन लागत, कच्चे माल की बढ़ी कीमतें और कमजोर रुपया शामिल हैं।
भाषा योगेश अजय
अजय

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