‘डस्टर’ की वापसी से मिड-साइज एसयूवी खंड में प्रतिस्पर्द्धा तेज होने की उम्मीद
'डस्टर' की वापसी से मिड-साइज एसयूवी खंड में प्रतिस्पर्द्धा तेज होने की उम्मीद
(प्रेम कांत सिंह)
नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) घरेलू यात्री वाहन बाजार में मझोले आकार वाली एसयूवी की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ी है। क्रेटा एवं सेल्टोस जैसे कई मॉडलों की मौजूदगी के बीच रेनो के पुराने लोकप्रिय मॉडल ‘डस्टर’ को दोबारा पेश किए जाने से इस खंड में प्रतिस्पर्धा तेज होने की उम्मीद है।
इस वाहन खंड में हुंदै के क्रेटा और किआ के सेल्टोस मॉडल की संयुक्त रूप से लगभग आधी हिस्सेदारी है। इनके अलावा मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा एवं टोयोटा हाइराइडर, स्कोडा कुशाक और फॉक्सवैगन टाइगुन जैसे मॉडलों ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। ऐसे में रेनो ने भी डस्टर से काफी उम्मीद लगाई हुई हैं।
वाहन विशेषज्ञों के मुताबिक, डस्टर को भारत में उस मॉडल के तौर पर देखा जाता है जिसने एक दशक पहले सही मायने में एसयूवी खंड को मुख्यधारा में लाने का काम किया था। अपने मजबूत सस्पेंशन, खराब सड़कों पर स्थिरता और राजमार्गों पर भी भरोसेमंद ड्राइविंग को इसकी खासियत माना गया था। लेकिन समय के साथ खुद को नहीं ढाल पाने की वजह से फ्रांसीसी कंपनी रेनो को यह मॉडल बंद करना पड़ा था।
हालांकि अब रेनो इंडिया भारतीय बाजार को लेकर अधिक प्रतिस्पर्द्धी होने की अपनी रणनीति के तहत इस लोकप्रिय मॉडल को फिर से पेश करने जा रही है। इस गणतंत्र दिवस पर डस्टर मॉडल नए अवतार में वापसी करने जा रहा है।
रेनो इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) स्टेफन डेब्लेज ने डस्टर की वापसी को भारतीय बाजार के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए कहा था, ‘डस्टर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक लीजेंड है। यह रोमांच, भरोसे और नवाचार का प्रतीक रही है। नई डस्टर अपनी विरासत बनाए रखते हुए आधुनिक डिजाइन, उन्नत प्रौद्योगिकी और बेहतर प्रदर्शन के साथ वापसी करेगी।’
हालांकि जानकारों का कहना है कि रेनो इंडिया के लिए बदले हुए माहौल में अपनी पुरानी कामयाबी को दोहरा पाना आसान नहीं होगा। मिड-साइज एसयूवी का खरीदार आज नए फीचर, कनेक्टिविटी, बड़ी टचस्क्रीन, सनरूफ और उच्च सुरक्षा रेटिंग जैसे पहलुओं पर पहले से कहीं ज्यादा ध्यान देता है।
उद्योग जगत से जुड़े जानकारों के मुताबिक, अगर रेनो नई डस्टर को उसके पुरानी खूबियों के साथ नए दौर के फीचर से भी लैस करती है तो इस खंड की तस्वीर काफी रोमांचक हो जाएगी।
स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) खंड की लोकप्रियता में भारतीय ग्राहक की मानसिकता ने भी अहम भूमिका निभाई है। दरअसल शहरी इलाकों में एसयूवी अब जीवनशैली का एक हिस्सा बन चुकी है जहां ब्रांड की छवि और नए-नए फीचर ग्राहक के निर्णय को प्रभावित करते हैं। वहीं, दूसरी एवं तीसरी श्रेणी के शहरों में आज भी ग्राहक ऐसी गाड़ी चाहता है जो खराब सड़कों, लंबे सफर और कम रखरखाव में भरोसेमंद साबित हो।
विश्लेषकों का मानना है कि डस्टर इस ग्राहक वर्ग को दोबारा आकर्षित कर सकती है लेकिन इसमें नए मॉडल की कीमत और उसका फीचर एवं दमदार विरासत के बीच बेहतर संतुलन अहम भूमिका निभाएगा।
मिड-साइज एसयूवी खंड में मारुति एवं टोयोटा ने अधिक माइलेज देने वाले इंजन और स्ट्रांग हाइब्रिड प्रौद्योगिकी के जरिये अलग बढ़त बनाई है, जबकि हुंदै एवं किआ के मॉडलों की खासियत फीचर एवं प्रीमियम अंदाज रही है। वहीं स्कोडा एवं फॉक्सवैगन ने ड्राइविंग में सहज एवं सुरक्षित होने को अपनी खासियत बनाई है। ऐसे में डस्टर की वापसी एक ऐसे मॉडल के रूप में हो सकती है जो शहरी इलाकों के अलावा कस्बों एवं ग्रामीण इलाकों के खराब रास्तों पर भी चलने में सहज हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रेनो नई डस्टर को मजबूत इंजन, संतुलित फीचर पैकेज और प्रतिस्पर्धी कीमत पर पेश करने में सफल रहती है तो मिड-साइज एसयूवी खंड में प्रतिस्पर्द्धा को दिलचस्प बना सकती है।
भाषा प्रेम पाण्डेय
पाण्डेय


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