नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) चावल निर्यातकों ने बृहस्पतिवार को ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा साझा हमले के बाद ईरान संकट से निपटने के लिए सरकार से तुरंत राहत के उपाय की मांग की है। जिसमें बंदरगाह से जुड़े प्रभार में छूट तथा भुगतान समायोजन की मांग भी शामिल है।
उन्होंने बंदरगाह से जुड़े प्रभार (स्टोरेज/डेमरेज और दूसरे शुल्क) में छूट मांगी है, जहां जहाज रद्द होने की वजह से कार्गो वापस हो जाता है। ऐसे में पारगमन में कार्गो को वापस करने, राह बदलने करने की सुविधा के साथ दस्तावेजीकरण और भुगतान समायोजन के लिए सीमा शुल्क और रिजर्व बैंक की मदद की मांग की गई है।
इसके अलावा, उन्होंने सरकार से एक सरकारी परामर्श जारी करने का आग्रह किया है जिसमें इस रुकावट को एक अपरिहार्य स्थिति की घटना के रूप में मान्यता दी जाए ताकि गलत तरीके से जुर्माने को रोका जा सके और कोविड-काल की राहत की तरह ही अस्थायी कार्यशील पूंजी सीमा और ऋण विस्तार के ज़रिये तात्कालिक बैंकिंग मदद दी जाए।
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ ने कहा कि ये कदम ज़रूरी हैं क्योंकि ईरान संकट और खास समुद्री रास्तों पर बढ़ती अस्थिरता के बाद निर्यातकों को खेप और लॉजिस्टिक्स में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसने कहा कि निर्यातकों को कंटेनर की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है और वे पश्चिम एशिया के लिए जहाजों के आने-जाने पर रोक/रद्द होने और लागत में तेज़ बढ़ोतरी की शिकायत कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मालवहन में लगभग 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि खाड़ी देशों के लिए युद्ध जोखिम प्रभार और बीमा प्रीमियम में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है।
महासंघ कहा, ‘‘बंकर इंधन की कीमतें भी बढ़ी हैं (सदस्यों ने बताया कि समुद्र्री जहाज ईंधन तेल लगभग 520 डॉलर से बढ़कर लगभग 700 डॉलर हो गया है), जिससे अनुबंध से मिलने वाली प्राप्तियों पर और असर पड़ा है। घरेलू बाजार में, पिछले 72 घंटों में बासमती की कीमतों में लगभग 7-10 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे कार्यशील पूंजी का दबाव बढ़ गया है।’’
इसने आगे कहा, ‘‘जब निर्यात खेप में देरी होती है या उसे आगे बढ़ाया जाता है, तो हमारे निर्यातक अचानक लगने वाले मालभाड़ा, ईंधन और बीमा के झटकों को झेल नहीं सकते।’’
पश्चिम एशिया के लिए कंटेनर नहीं मिल रहे हैं, और दूसरी जगहों के लिए भी कमी है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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