कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकी के लिए 20,000 करोड़ रुपये का ढांचा खड़ा करने पर विचार
कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकी के लिए 20,000 करोड़ रुपये का ढांचा खड़ा करने पर विचार
नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) केंद्र सरकार कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाला एक ढांचा खड़ा करने पर विचार कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सीसीयूएस प्रौद्योगिकी में उद्योगों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़कर उसका उपयोग किया जाता है या सुरक्षित रूप से जमीन के नीचे जमा कर दिया जाता है, ताकि वह वातावरण में न पहुंच पाए।
बिजली मंत्रालय में संयुक्त सचिव आधार राज ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि इस प्रस्तावित ढांचे को मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सीसीयूएस प्रौद्योगिकी भारत के लिए आर्थिक वृद्धि और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर पेश करती है। नीतिगत समर्थन, संस्थागत ढांचे और रणनीतिक निवेश के जरिए कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना जरूरी है।’’
आधार राज ने कहा, “नीति निर्माताओं, उद्योग, शोध संस्थानों और निवेशकों के बीच मजबूत सहयोग से ऐसे कार्बन प्रबंधन समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जो बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हों।”
उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में भी सीसीयूएस प्रौद्योगिकियों के प्रोत्साहन के लिए पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव किया गया है।
यह पहल भारत के वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य के अनुरूप है। इसके साथ ही यह औद्योगिक वृद्धि और बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के उद्देश्य को भी ध्यान में रखती है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, निवेशकों और हरित विशेषज्ञों ने भाग लिया और सीसीयूएस की भूमिका पर चर्चा की।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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