यूक्रेन के हमलों के बीच रूस ने अगस्त में भारत से ईंधन का रिकॉर्ड आयात किया

यूक्रेन के हमलों के बीच रूस ने अगस्त में भारत से ईंधन का रिकॉर्ड आयात किया

यूक्रेन के हमलों के बीच रूस ने अगस्त में भारत से ईंधन का रिकॉर्ड आयात किया
Modified Date: September 13, 2026 / 10:49 am IST
Published Date: September 13, 2026 10:49 am IST

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) रूस ने अगस्त में रिकॉर्ड 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इसमें भारत की उस रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल से तैयार किया गया पेट्रोल भी शामिल है, जिसमें रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की आंशिक हिस्सेदारी है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने के बीच यह आयात बढ़ा है।

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में रूस के तेल उत्पादों के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रही।

भारत ने अगस्त में रूस को 1.20 लाख टन पेट्रोल की आपूर्ति की, जिसकी कीमत करीब 7.8 करोड़ यूरो थी। सीआरईए के अनुसार, रूस में आयात किए गए तेल उत्पादों की मात्रा पिछले मासिक रिकॉर्ड से सात गुना से अधिक और पूरे 2025 में आयात की गई मात्रा की तुलना में करीब तीन गुना रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से रूस भेजा गया पूरा पेट्रोल गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी में तैयार किया गया था और इसे यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली नायरा एनर्जी ने रोसनेफ्ट को बेचा।

रोसनेफ्ट के पास नायरा एनर्जी की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सीआरईए के मुताबिक, 2026 के पहले आठ महीनों में वाडिनार रिफाइनरी के लिए इस्तेमाल किया गया पूरा कच्चा तेल रूस से आया, जबकि 2025 में यह हिस्सेदारी 81 प्रतिशत थी।

सीआरईए ने कहा कि इसका मतलब यह है कि रूस अपनी ही आंशिक स्वामित्व वाली रिफाइनरी को कच्चा तेल भेजकर उसे ऐसे ईंधन में बदलवा रहा है, जिसका उत्पादन वह घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में नहीं कर पा रहा है और फिर उस ईंधन को दुनिया के दूसरे हिस्से से वापस रूस मंगा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वाडिनार से रूस भेजे गए पेट्रोल की प्रत्येक खेप को मिस्र के तट के पास एक जहाज से दूसरे जहाज में स्थानांतरित किया गया और इसके बाद रूस के बंदरगाह बेलोये मोरे पर उतारा गया। सीआरईए ने कहा कि इन गतिविधियों में शामिल सभी जहाज प्रतिबंधित टैंकर थे।

सीआरईए के अनुसार, यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे पर लगातार किए जा रहे ड्रोन हमलों ने घरेलू ईंधन उत्पादन को प्रभावित किया है और देश में ईंधन की कमी की स्थिति पैदा की है।

रूस ऐतिहासिक रूप से दुनिया के सबसे बड़े परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों में रहा है। हालांकि, अगस्त में उसके कुल तेल उत्पाद आयात में पेट्रोल की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत रही, जबकि 2023 से 2025 के बीच इसका औसत केवल छह प्रतिशत था।

अगस्त में दक्षिण कोरिया ने रूस को 18,000 टन तेल उत्पादों की आपूर्ति की, जिनमें अधिकांश गैसऑयल था। वहीं, मिस्र ने करीब 25,000 टन डीजल रूस को निर्यात किया, जिसकी कीमत 1.6 करोड़ यूरो थी।

इस बीच, अगस्त में रूस से समुद्री मार्ग के जरिये होने वाला तेल उत्पाद निर्यात मात्रा के आधार पर 21 प्रतिशत घट गया।

सीआरईए ने कहा कि रूस के बंदरगाहों से तेल उत्पादों की ‘लोडिंग’ लगातार तीसरे महीने घटी और अगस्त, 2025 के स्तर के आधे से भी कम रही।

यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस के चौथे सबसे बड़े तेल उत्पाद निर्यात बंदरगाह रहे तुप्से से लगातार तीसरे महीने तेल उत्पादों की एक भी खेप रवाना नहीं हुई। यहां मई से लगातार यूक्रेनी ड्रोन हमलों का असर देखा जा रहा है।

भाषा अजय अजय

अजय


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