शह मात The Big Debate: शराब कांड में उबाल, पिक्चर अभी बाकी है! नेताओं के बीच हो रहा बयानों का गैंगवॉर, जहरीली शराब मुद्दे पर फिर क्यों गर्म है सियासत?

Sagar Toxic Liquor Case Politics: सागर के ज़हरीली शराब कांड ने भाजपा को बैकफुट में तो ज़ाहिर तौर पर धकेला ही है।

शह मात The Big Debate: शराब कांड में उबाल, पिक्चर अभी बाकी है! नेताओं के बीच हो रहा बयानों का गैंगवॉर, जहरीली शराब मुद्दे पर फिर क्यों गर्म है सियासत?

Sagar Toxic Liquor Case Politics/Image Credit: IBC24

Modified Date: September 12, 2026 / 11:24 pm IST
Published Date: September 12, 2026 11:23 pm IST
HIGHLIGHTS
  • सागर ज़हरीली शराब कांड में पुलिस तकरीबन 33 लोगों को आरोपी बना चुकी है।
  • कुछ आरोपियों के घरों में बुलडोज़र का पीला पंजा चल चुका हो।
  • लेकिन फिर भी इस मुद्दे पर राजनीति कम होने का नाम नहीं ले रही है।

Sagar Toxic Liquor Case Politics: भोपाल: सागर ज़हरीली शराब कांड में भले ही पुलिस तकरीबन 33 लोगों को आरोपी बना चुकी है। भले ही कुछ आरोपियों के घरों में बुलडोज़र का पीला पंजा चल चुका हो। भले ही मुख्य आरोपी का शार्ट एनकाउन्टर हो चुका हो, लेकिन अब बारी है सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर ही एक दूसरे को उलझाने की। खुरई के पूर्व विधायक जो डेपुटेशन में कांग्रेस से पिछले चुनाव के वक्त भाजपा में आए ने नाम नहीं लिखा मगर इनके निशाने पर अक्सर पूर्व गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ही रहते हैं। ज़ाहिर है कि शुरुआत भूपेन्द्र सिंह के समर्थकों की तरफ़ से ही हुई होगी, तभी गोविन्द राजपूत को ख़ुद आकर सफ़ाई देना पड़ी थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तो ऐसे उत्साह में हैं कि कह रहे हैं “सभी हत्यारे हैं” कांग्रेस का आरोप है भाजपा नेताओं के संरक्षण में ही सागर में अवैध शराब बेचीं जा रही थी।

पहले छिंदवाड़ा कफ़ सीरप मामला, फिर इंदौर में दूषित पानी से मौतें और फिर बालाघाट में बच्चों की मौत के बाद सागर के ज़हरीली शराब कांड ने भाजपा को बैकफुट में तो ज़ाहिर तौर पर धकेला ही है। सागर के दोनों नेताओं के समर्थक भोपाल भी एक दूसरे की शिकायत करने आ रहे हैं, हालांकि अभी उन्हें पार्टी इंटरटेन नहीं कर रही है। (Sagar Toxic Liquor Case Politics) सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि सागर मामले में कड़ी कार्यवाही हुई है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

Sagar Toxic Liquor Case Politics: सागर बीते कई सालों से शक्ति प्रदर्शन का केंद्र तो बना ही हुआ है। गोविन्द राजपूत और भूपेन्द्र सिंह की अदावत तो जग ज़ाहिर है। सवाल ये है कि पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल ने दोनों के बीच जो डिनर डिप्लोमेसी करवाई थी उसकी मियाद ख़त्म हो गई क्या? दोनों के करीबियों पर “पीले पंजे का प्रहार” क्या भोपाल से कोई ख़ास सन्देश देने के लिए किया जा रहा है।

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